फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक सड़क का नाम भी नही है आजाद हिंद सेनानी के नाम पर

विज्ञापन
विज्ञापन
बनबसा (चंपावत)। स्थानीय निवासी आजाद हिंद फौज सेनानी स्व. कैप्टन करम चंद करीब डेढ़ दशक पहले दिवंगत हो चुके हैं लेकिन उनके नाम पर किसी संपर्क मार्ग का भी नाम नहीं रखा जा सका जबकि उनके परिजन वर्षों से उनके नाम पर किसी स्कूल, स्टेडियम या मार्ग का नाम रखने की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन

स्व. करम चंद पिथौरागढ़ के वर्दियाकोट के मूलवासी थे। उनके पुत्र डॉ. जनक चंद बताते हैं कि उनके पिता ने पिथौरागढ़ से हाईस्कूल करने के बाद 18 वर्ष की आयु में आजाद हिंद सेनानी बने। बचपन में ही पिता का निधन होने पर स्व. कैप्टन करम चंद की मां ने खेती, मजदूरी की। दूध बेच कर जैसे-तैसे उन्हें पढ़ाया। हाईस्कूल के बाद घर की हालत देख वे नौकरी के लिए बाहर निकल पड़े थे। वे रंगून जेल में भी रहे। इसलिए उन्हें लापता घोषित किया गया था। उनकी मां ने उनकी सलामती के लिए कई जतन किए। बाद में वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। देश के आजाद होने पर वह भारतीय सेना से जुड़े। वर्ष 1976 में वे भारतीय सेना की एएमसी से ऑनरेरी कैप्टन पद से सेवानिवृत्त हुए। तभी से वे बनबसा में रहने लगे। वर्ष 2007 में करीब 87 वर्ष की आयु में स्व. चंद दिवंगत हुए। उन्हें आजाद हिंद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं भारतीय सेना से ऑनरेरी कैप्टन की तीन पेंशन मिलती थी।
वे जीवन पर्यंत खेतीबाड़ी के अलावा समाजसेवा में लगे रहे। स्वच्छ अनुशासित छवि के धनी स्व. चंद बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। उनकी दो पुत्रियां विवाहित एवं अपने परिवार में हैं। उनके पुत्र डॉ. जनक चंद पेशे से डॉक्टर हैं। वे भी अपने पिता की तरह खेती कर रहे हैं। वे लंबे समय से बनबसा में किसी स्कूल, अस्पताल या किसी सड़क का नाम अपने पिता के नाम पर रखने की आवाज उठाते रहे लेकिन देश की आजादी में योगदान देने वाले इस सपूत का उनके निधन बाद भी न तो कहीं कोई स्मारक बना नहीं। उनके नाम पर किसी सड़क का नाम भी नहीं रखा जा सका।
विज्ञापन

स्व. कैप्टन चंद को लोग मानते प्रेरणा स्रोत
बनबसा (चंपावत)। क्षेत्र के युवा स्व. कैप्टन करम चंद का नाम जीवित रखने को सभी की सहमति पर बनबसा में कहीं स्मारक बनाने या किसी सड़क का नामकरण करने की जरूरत बताते हैं। तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त युवा जानकी चंद उन्हें देश की आजादी में योगदान देने वाला सच्चा सपूत बतातीं हैं। विद्या चंद स्व. कैप्टन चंद को प्रेरणा स्रोत बतातीं हैं। नकुल जोशी का मानना है कि आजाद हिंद फौज के सेनानी का नाम आते ही स्वत: सुभाष चंद्र बोस का स्मरण हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें