चंपावत/लोहाघाट। जिले के विभिन्न स्थानों में रामलीला का मंचन जोर पकड़ने लगा है। कोट अमोड़ी, स्वांला, बस्तियागूंठ, लोहाघाट नगर और सैलपेडू आदि स्थानों में रामलीला मंचन देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कोट अमोड़ी में शुक्रवार को दूसरे दिन की लीला में ताड़का वध से लेकर पुष्पवाटिका की सैर तक की रामलीला का आयोजन किया गया।
व्यवस्थापक खीमानंद भट्ट ने बताया कि कोट अमोड़ी की रामलीला का मंचन सदियों से चला आ रहा है। कोट अमोड़ी के अलावा स्वांला और बस्तियागूंठ में भी रामलीला का आयोजन जारी है। उधर, लोहाघाट नगर में रामलीला की धूम मची है। रामलीला देखने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। श्रीराम सेवा सांस्कृतिक रामलीला कमेटी के अध्यक्ष जीवन मेहता के निर्देशन और शिक्षक नरेश राय के संचालन में लीला का मंचन किया जा रहा है। दूसरे दिन विश्वामित्र ने दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को मांगा, दशरथ के मना करने पर विश्वामित्र राजा दशरथ से कहते हैं बता जल्दी अरे राजन, तू राम देगा कि नहीं देगा, नहीं तो श्राप देता हूं, जो तू अब राम नहीं देगा, वचन दे के तूने राजन, प्रतिज्ञा पहले क्यों की थी, किए अपने की भोगेगा जो तू अब राम नहीं देगा।
दशरथ ने यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को जंगल की ओर भेजा, राम लक्ष्मण ने ताड़का वध किया। जनकपुरी से मुनि विश्वामित्र को सीता स्वयंवर का निमंत्रण आना। विश्वामित्र के साथ राम लक्ष्मण का जनकपुरी में प्रवेश। पुष्प वाटिका में सीता को देख राम लक्ष्मण से कहते हैं तनिक निहारो तुम जानकी की छवि भाई, वाटिका फिरत कोटि चंद्र भी लजाई है। लीला के मंचन में मुकेश साह, प्रकाश राय, विपिन वर्मा, आनंद पुजारी, जीवन गहतोड़ी, दानू सुतेड़ी, कैलाश बगौली, ईश्वरी साह आदि सहयोग कर रहे हैं।
मैं तो हूं ताड़का
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय में सदर की रामलीला में विश्वामित्र-दशरथ संवाद, ताड़का वध, अहिल्या तारण, गौरा पूजन से पुष्पवाटिका तक की रामलीला का मंचन किया गया। कोविड काल के बाद शुरू हुई रामलीला को देखने के लिए दर्शकों में उत्साह दिखाई दिया।
शुक्रवार रात विश्वामित्र-दशरथ संवाद, ताड़का वध, अहिल्या तारण, गौरा पूजन से पुष्पवाटिक तक लीला का मंचन किया। ताड़का के पात्र पंकज ने सुंदर अभिनय से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। राजा जनक के आमंत्रण पर जनकपुरी जाते राम ने अहिल्या का तारण किया। पुष्प वाटिका, गौरा पूजन दृश्य के मंचन में कलाकारों ने सुंदर अभिनय किया। उत्कर्ष पाटनी राम, पीयूष उप्रेती लक्ष्मण, सुजल वर्मा सीता, हिमांशु थापा अहिल्या, नीरज जोशी विश्वामित्र, जगदीश डसीला जनक, अनिल सुबाहु, मिक्की मारीच बने। मुख्य अतिथि डॉ. अशोक पंत, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी देहरादून के संस्थापक कुलपति प्रो. संजय जसोला रहे। इस दौरान 125वें रामलीला मंचन पर रामलीला कमेटी ने 225 पुराने कलाकारों एवं कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया। टकाना की रामलीला में कलाकारों ने शानदार मंचन कर दर्शकों की वाहवाही लूटी। रामलीला में कलाकारों ने ताड़का, सुबाहु, मारीच से लेकर पुष्प वाटिका के दृश्यों तक का सुंदर मंचन किया। दयानंद भट्ट ने संचालन किया। हारमोनियम पर वरिष्ठ कलाकार केदार भट्ट, दिनेश उपाध्याय, भुवन पांडेय, मजीरा वादक श्रीकृष्ण अवस्थी रहे। चंद्रशेखर महर, यशवंत महर, गिरिजा जोशी आदि ने सहयोग दिया।