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प्रसूता अमिशा की मौत का मामला: दोनों गायनोकोलॉजिस्ट का वेतन रोकने के दिए निर्देश, जांच के लिए कमेटी गठित

Wed, 17 Jul 2024 12:11 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत

सार

चंपावत में चानमारी निवासी प्रसूता अमिशा (26) की मौत मामले में गंभीरता दिखाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच कमेटी गठित कर दी है। साथ ही जिला अस्पताल में तैनात दोनों गायनोकोलॉजिस्ट के वेतन आहरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
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प्रसूता अमिशा की मौत का मामला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंपावत में चानमारी निवासी प्रसूता अमिशा (26) की मौत मामले में गंभीरता दिखाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच कमेटी गठित कर दी है। साथ ही सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने जिला अस्पताल में तैनात दोनों गायनोकोलॉजिस्ट के वेतन आहरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

चंपातव जिला अस्पताल में सोमवार को सामान्य प्रसव से बच्ची के जन्म के बाद प्रसूता अमिशा की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। चिकित्सकों ने उसे हायर सेंटर रेफर किया, निजी अस्पताल पहुंचने तक उसने दम तोड़ दिया था।

मामले की जांच के लिए सीएमओ ने समिति गठित कर दी है, जिसमें उपजिला अस्पताल टनकपुर की सर्जन डॉ. प्रभा जोशी, पीएचसी बाराकोट के वरिष्ठ चिकित्सक मंजीत सिंह और प्रधान सहायक जिला चिकित्सालय चंपावत योगेश जोशी शामिल हैं। समिति अस्पताल में तैनात एलएमओ और पीड़ित परिवार के परिजनों से पूछताछ करेगी। समिति को पांच दिन में रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय में जमा करनी होगी। इसके अलावा अस्पताल में तैनात दोनों गायनोकोलॉजिस्ट के वेतन आहरण रोकने के निर्देश पीएमएस डॉ. पीएस खोलिया को दिए हैं।

कौन समझेगा गर्भवतियों का दर्द

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नाकोलॉजिस्ट नहीं होने से गर्भवतियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सामान्य प्रसव तो हो रहे हैं, लेकिन सिजेरियन के लिए ऑपरेशन थियेटर होने के बाद भी गायनाकोलॉजिस्ट न होना विडंबना है। महिलाओं का कहना है कि जिले में लोहाघाट, चंपावत और टनकपुर अस्पतालों में गायनाकोलॉजिस्ट की सुविधा होनी चाहिए। आखिर कब तक गर्भवती महिलाएं रेफर होती रहेंगी। गर्भवती का दर्द कोई समझने वाला है।

जिला अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के कारण आए दिन मरीजों को रेफर किया जा रहा है। दो गायनाकोलॉजिस्ट होने के बाद भी गर्भवती महिलाएं रेफर हो रही हैं। अमर उजाला ने पांच जुलाई के अंक में गायनाकोलॉजिस्ट नहीं, कैसे होंगे प्रसव शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर का संज्ञान लेकर अस्पताल प्रबंधन ने एलएमओ को सामान्य प्रसव की जिम्मेदारी तो दी, लेकिन गंभीर मामलों गायनाकोलॉजिस्ट नहीं होने से दिक्कत हो रही है। इधर सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि अगर परिजनों ने पोस्टमार्टम कराया होता तो प्रसूता के मौत के कारणों का पता चल जाता। आग्रह के बाद भी उन्होंने ऐसा नहीं किया।

आला अधिकारियों ने भी नहीं लिया संज्ञान
आला अधिकारियों ने भी मामले का संज्ञान नहीं लिया। अस्पताल में तैनात एक गायनोकॉलोजिस्ट डॉ. प्रियंका कांडपाल दो सप्ताह के मेडिकल अवकाश पर हैं। दूसरी डॉ. मंदाकिनी ने तबीयत खराब होने की बात कहकर तीन जुलाई से अस्पताल में नहीं है। यह गायनोकॉलोजिस्ट पूर्व में मातृत्व अवकाश पर भी रही थीं। अब गायनोकॉलोजिस्ट बिना किसी लिखित पत्र के अवकाश पर चली गई हैं, लेकिन वह कब आएंगी इसकी जानकारी किसी को नहीं है। आला अधिकारियों ने सीएम की विधानसभा की इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। इसका नतीजा हुआ कि प्रसूता को अपनी जान गंवानी पड़ी।

सीएम की विधानसभा में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। अस्पताल में गायनाकोलॉजिस्ट नहीं होने का खामियाजा गर्भवतियों भुगतना पड़ रहा है।

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- पूरन कठायत, कांग्रेस जिलाध्यक्ष।

बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के कारण गर्भवती रेफर की जा रही हैं। गायनाकोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण सामान्य प्रसव में भी खतरा बना रहता है।

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 - अमित गड़कोटी, अधिवक्ता, चंपावत।

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