चंपावत। अक्तूबर में हुई तीन दिन तक की मूसलाधार बारिश से आई आपदा के जख्म कई जगह अब भी हरे हैं। चंपावत शहर में ही दो दलित गरीब भाइयों का परिवार आपदा के 53 दिन बाद भी अपने घर से दूर है। उन्हें न दिन का चैन है और न ही रात में सुकून की नींद मिल पा रही है। आपदा से मकान टूटने के बाद दोनों परिवारों के आठ लोगों के लिए रामलीला मंच शरणस्थली बना है। जहां आसरा मिलने के बावजूद हर पल भारी पड़ रहा है।
तहसील कार्यालय से बमुश्किल 300 मीटर दूर है पहरुयूड़ा मोहल्ला। 19 अक्तूबर को तहसील की दीवार टूटने से आई आपदा से नवल किशोर के मकान का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ और घर का सामान भी बर्बाद हो गया। दूसरे भाई नवीन प्रहरी का मकान विशालकाय पत्थरों के टकराने से हिल गया। मलिन बस्ती योजना से कुछ साल पहले ये मकान बने थे लेकिन अब ये मकान मिट्टी और पत्थरों के ढेर में तब्दील हो गए हैं।
तब से डेढ़ माह बाद भी मकान की मरम्मत तो दूर, पत्थरों के ढेर को भी नहीं हटाया जा सका है। संकरी जगह होने से मकान के पास मलबे को हटाने के लिए जेसीबी का उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके लिए अब दूसरा विकल्प अपनाने की बात प्रशासन कह रहा है।
तबसे दोनों भाइयों के परिवार पास में स्थित रामलीला मंच में सिर छुपाने के लिए मजबूर हैं। नजदीक के हैंडपंप से प्यास बुझ रही है, तो रात को अंधेरे से बचाने के लिए खुद बिजली की व्यवस्था की गई है, लेकिन शौच के लिए इस परिवार को जोखिम के बीच पुराने मकान में बने शौचालय का ही आसरा है। नवल किशोर पेंटिंग कर गुजारा करता है, तो दूसरे भाई नवीन के पास बेकाम है। गरीबी के बीच आपदा के जख्मों की पीड़ा इन परिवारों को कचोट रही है। छोटे से रामलीला मंच में दोनों परिवारों के आठ लोग किसी तरह दिन गिन रहे हैं।
पढ़ाई करना तो दूर वक्त काटना भी हो रहा मुश्किल
चंपावत। दोनों परिवारों के स्कूल जाने वाले चारों बच्चों की पढ़ाई भी आपदा की मार से प्रभावित है। नवल का बेटा अभिषेक इंटर और बेटी अर्पिता हाईस्कूल में पढ़ती है। वहीं नवीन की पुत्री अंजलि इंटर और पुत्र आदित्य हाईस्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन रामलीला मंच की बेहद कम जगह में पढ़ाई तो दूर, रहना भी दूभर हो रहा है।
आपदा राहत राशि से नहीं मिल रही राहत
चंपावत। आपदा की चोट से उबरने के लिए नवल किशोर को एक लाख एक हजार नौ सौ रुपये दिए गए हैं लेकिन नवल का कहना है कि इस रकम से मकान की मरम्मत भी मुमकिन नहीं है। वहीं दूसरे भाई नवीन लाल को 3800 रुपये की राहत मिली है।
यह मामला आज ही मेरे संज्ञान में आया है। तहसीलदार से दोनों परिवारों के लिए किराये के मकान की व्यवस्था करने को कह दिया गया है। आपदा मद से दोनों परिवारों को तीन-तीन महीने तक किराये के रूप में हर माह चार हजार-चार हजार दिलाए जाएंगे।
- विनीत तोमर, डीएम, चंपावत।