चंपावत। जिले में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन में जहां विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासियों की बड़ी संख्या में घर वापसी जारी है। वहीं घर पहुंच कर प्रवासियों को आसपास के क्वारंटीन सेंटरों में रखा जा रहा है, पर कई सेंटरों में रह रहे प्रवासी क्वारंटीन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। जिस कारण प्रवासियों की लापरवाही अन्य लोगों पर भारी पड़ने का अंदेशा बढ़ गया है।
दूरस्थ गांवों के प्राथमिक विद्यालयों, पंचायत घर और अन्य सार्वजनिक स्थानों में बनाए गए क्वारंटीन सेंटरों में रात की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं। जिसके चलते यह शिकायतें मिल रही हैं कि दूरस्थ गांवों में क्वारंटीन किए गए लोग रात में अपने अपने घरों को चले जा रहे हैं। जिससे कोरोना के संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।
एडीएम टीएस मर्तोलिया के अनुसार प्रशासन की ओर से क्वारंटीन सेंटरों में दिन के समय अध्यापकों, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा ग्राम प्रधान भी क्वारंटीन सेंटरों की देखभाल कर रहे हैं। यदि किसी क्वारंटीन सेंटर से इस तरह की शिकायत आती है तो संबंधितों को संस्थागत क्वारंटीन में रखा जाएगा।
मुंबई से पहाड़ों तक पहुंचा कोरोना
चंपावत। तीन दिन पहले तक ग्रीन जोन में शामिल चंपावत जिले के पहाड़ों में कोरोना का संक्रमण मुंबई से पहुंचा है। जिले में अब तक कोरोना पाजिटिव के आठ मरीज आइसोलेट किए गए हैं। सभी आठ के आठ मरीजों की यात्रा इतिहास मुंबई से जुड़ी है।
जिस कारण प्रशासन की ओर से मुंबई से आने वाले प्रवासियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। डीएम एसएन पांडेय ने महाराष्ट्र से आने वाले प्रवासियों के सैंपल परीक्षण के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं।