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जंगल में जगह-जगह आग, मकान जला

Sun, 01 May 2016 09:44 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
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जंगल में आग - फोटो : अमर उजाला
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 जंगल की आग में कोई कमी नहीं आ रही है। उल्टा अब तेजी से दावाग्नि कई जगह मकानों को भी अपने चपेट में ले रही है। पाटी, लोहाघाट और बाराकोट में चीड़ के जंगलों में लगी आग में सैकड़ों पेड़ जलकर राख हो गए हैं। मैराली बसान में शनिवार रात एक दुमंजिला पुराना मकान जल कर बुरी तरह नष्ट हो गया। इस मकान में कोई नहीं रहता था। वहीं दो गांवों में घास के आठ लुट्टे जल गए हैं। आग के चलते क्षेत्र में धुंध फैली है। इससे लोगों को दिक्कतें भी हो रही है।
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बसान गांव के देवकीनंदन पुत्र चूड़ामणि का मकान शनिवार रात जंगल की आग की लपटों से जल गया। मकान में आग लगने से करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हो गया। वारदात के बाद राजस्व उप निरीक्षक नाथ सिंह कार्की ने मौका मुआयना किया। उधर, चंपावत जिले में बीते 24 घंटों में जिले में दावाग्नि की तीन घटनाओं में 3 हेक्टेयर जंगल जल गया। मानेश्वर, लधिया घाटी, काली कुमाऊं आदि में कई जगह जंगल धधक रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी बीएम टम्टा का कहना है कि आग बुझाने के लिए वन विभाग की टीम ग्रामीणों के सहयोग से जुटी हुई है।

जंगली आग से अतखंडी गांव में दया किशन और दयाल राम के दो दो लुट्टे घास के जल चुके हैं। पानी के अभाव के चलते ग्रामीणों ने मिट्टी डालकर किसी तरह आग पर नियंत्रण किया। ग्राम प्रधान संजय जोशी ने वन विभाग से पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। पठल्ती गांव में भी आम के पेड़ों से गुजरी विद्युत लाइन में चिंगारी निकलने बसे मंजू जोशी तथा कमला जोशी के दो-दो घास के लुट्टे जल गए हैं। ये महिलाएं दूध बेचकर गुजारा कर रही थी। 
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शनिवार की रात को मेलकुना स्थान में आग लगने से भू स्वामियों द्वारा लगाई गई बाड़ जलकर राख हो गई। भुमलाई, बलांई, पंचेश्वर, रौंसाल आदि के जंगलों में आग लगी हुई है। पाटी के किमाड़ीधार, बालातडी, साल, टांण, वैला, पनार घाटी के अलावा ढोली गांव के जंगलों में आग धधकी हुई है। आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग एवं ग्रामीणों द्वारा प्रयास किया जा रहा है।

जंगल की आग ने सात साल के रिकार्ड तोड़े
चंपावत। फायर सीजन में अभी करीब डेढ़ माह का वक्त है, लेकिन इस बार की जंगल की आग ने पिछले कई वर्षों के तमाम रिकार्ड तोड़ दिए हैं। 15 फरवरी से एक मई तक चंपावत में 61 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ गए हैं। इस साल आग की वारदात ने जंगल को बुरी तरह तबाह कर दिया है। 2010 से अब तक सबसे अधिक जंगल जले हैं। न केवल वारदातों की तादात ज्यादा है, बल्कि आग से नुकसान का रकवा भी सबसे अधिक है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस फायर सीजन में दावाग्नि की 28 वारदातें हो चुकी हैं। इन वारदातों में 61 हेक्टेयर जंगल स्वाहा हो चुका है।
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