चंपावत। आज से शुरू हो रहे फायर सीजन में इस बार जंगलों में आग लगने की आशंका ज्यादा देखने को मिल सकती हैं। इस बार पहाड़ों पर जाड़ाें में बर्फबारी और बारिश न होने कारण जंगल जनवरी से ही सुलगने लगे हैं।
वन विभाग के लिए इस बार फायर सीजन में वनों को आग से बचाना चुनौती से कम नही होगा। बर्फबारी और बारिश न होने से इस बार जनवरी से चंपावत डिवीजन के जंगलों में आग सुलगने लगी है। इससे गर्मियों के सीजन में जंगलों में आग की घटनाएं काफी बढ़ने की चिंता विभाग को सता रही है। हालांकि वन विभाग की ओर से इसको लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
वनाग्नि की रोकथाम के लिए इस बार 54 क्रू-स्टेशन बनाए गए हैं। बीते 10 वर्षों में चंपावत जिले में आग की सबसे अधिक घटनाएं वर्ष 2019 में हुईं थी, तब आग की 111 घटनाएं हुई थीं। इसमें 161.93 हेक्टेयर जंगल जलकर नष्ट हो गया था। वहीं सबसे कम घटनाएं वर्ष 2014 में मात्र एक हुई थी।
पिछले दस वर्षों में आग लगनी घटनाएं
वर्ष आग की घटनाएं प्रभावित क्षेत्र (हेक्टेयर)
2014 01 02.00
2015 15 15.00
2016 62 137.50
2017 34 50.40
2018 84 136.46
2019 111 161.93
2020 08 07.50
2021 73 55.77
2022 80 52.25
2023 25 15.52
कोट
फायर सीजन को लेकर वन विभाग की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार 54 क्रू-स्टेशन बनाने के साथ ही कंट्रोल बर्निंग का कार्य किया जा रहा है ताकि आग की घटनाओं को रोका जा सके। विभाग पूरी तरह से सतर्कता बरत रहा है। - नेहा चौधरी, उपप्रभागीय वनाधिकारी, चंपावत।
सीमांत में वनाग्नि से निपटने को बनाए 68 क्रू स्टेशन
आग की दृष्टि से संवेदनशील हैं 400 वन पंचायतें
पिथौरागढ़। यहां भी वन विभाग फायर सीजन (15 फरवरी से 15 जून तक) के लिए पूरी तैयारी कर चुका है। जाड़ों की तहर यदि इस दौरान भी बारिश नहीं हुई से सीजन को आगे बढ़ाया जाएगा। सीमांत जिले में वनाग्नि से निपटने को 68 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं।
इस बार बारिश और बर्फबारी बेहद कम होने से वनाग्नि की घटनाएं बढ़ने का अंदेशा लगाया जा रहा है। जनवरी में भी कई जगहों पर वन आग से धधकते रहे। वन विभाग के एसडीओ ज्वाला प्रसाद गौड़ ने बताया कि वनाग्नि से निपटने की पूरी तैयारी कर ली गई है। जिले में करीब 70,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। यहां 1600 वन पंचायतें हैं। आग की दृष्टि से 400 वन पंचायतें अति संवेदनशील श्रेणी में हैं।
आग से निपटने को जंगलों में पानी रिचार्ज की व्यवस्था की गई है। इससे वन्यजीवों को प्यास बुझाने में भी मदद मिलेगी। फायर लाइन पिरुल एकत्रीकरण किया जा रहा है। करीब एक हजार किमी में सड़क और रास्तों के दोनों ओर सफाई की जा रही है। साथ ही मॉकड्रिल कराई जा रही है। विभाग के पास वर्तमान में 68 वन दरोगा हैं। आग बुझाने के लिए 250 फायर वॉचर तैनात किए गए हैं। वनाग्नि की दृष्टि से बेड़ीनाग, डीडीहाट, पिथौरागढ़ और गंगोलीहाट अति संवेदनशील रेंज में शामिल हैं। संवाद