प्रमुख शक्तिपीठ मां पूर्णागिरि धाम के लिए दिसंबर 2016 तक मां पूर्णागिरि रोपवे प्रोजेक्ट को पूरा होना था। पिछले साल जून में मुख्यमंत्री हरीश रावत प्रोजेक्ट का शिलान्यास भी कर चुके हैं, मगर प्रोजेक्ट में काम पूरा होना तो दूर, अभी कायदे से काम ही शुरू नहीं हो सका। 2014 में पेड़ काटे जाने के बाद काम बंद हो गया और अब इस प्रोजेक्ट में काम शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है।
पर्यटन प्रोत्साहन और तीर्थयात्रियों की सहूलियतों के लिए उत्तराखंड इनफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (यूआईपीसी) के तहत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में रोपवे का काम शुरू किया गया। वन अनापत्ति के बाद सितंबर 2014 से रोपवे के लिए मां पूर्णागिरि क्षेत्र में पेड़ों का कटान किया गया। ठुलीगाड़ और हनुमानचट्टी के पास 74 पेड़ काट भी दिए गए। जून 2015 में सीएम ने बाकायदा रोपवे का शिलान्यास किया, मगर इसके बाद काम शुरू नहीं हुआ और अब उन जगहों पर फिर से झाड़-झंकार उग गए हैं। काम तो शुरू नहीं हुआ, उलटा इसकी लागत भी बढ़ गई।
पूर्णागिरि के एसडीएम नरेश दुर्गापाल का कहना है कि पहले 1.5 किलोमीटर हवाई दूरी वाले रोपवे की लागत 35 करोड़ रुपये थी, लेकिन 2011 की दर के इस इस्टीमेट को कंपनी ने मौजूदा दर में संशोधित कर 55 करोड़ कर दिया गया है। रोपवे का काम दिसंबर 2016 तक पूरा होना था, लेकिन अभी काम का प्रारंभिक चरण भी शुरू नहीं किया जा सका है। हनुमान चट्टी से काली मंदिर के बीच लगने वाले रोपवे में चार ट्रालियां लगेंगी। एक घंटे में 800 यात्रियों की आवाजाही हो सकेगी। रोपवे एक दिन में अधिकतम 10 घंटे तक चलेगा।
एक माह में शुरू होगा काम
रोपवे का निर्माण करने वाली दिल्ली की केआर आनंद कंपनी के प्रतिनिधि अनिल कुमार शर्मा का कहना है कि पूर्णागिरि रोपवे का काम एक माह के भीतर शुरू कर लिया जाएगा। उनका कहना है कि इंजीनियरों द्वारा रोक की दोबारा टेस्टिंग कराई गई। इस टेस्टिंग की 15 दिनों में रिपोर्ट मिल जाएगी, जिसके दो हफ्ते बाद काम शुरू हो जाएगा।
तो नहीं चलना पड़ेगा पैदल
इस वक्त तीर्थयात्रियों को भैरव मंदिर तक जीप और यहां से मां पूर्णागिरि के मुख्य मंदिर तक के 3 किमी दूरी को पैदल पार करना होता है, लेकिन रोपवे प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद मां पूर्णागिरि धाम के दर्शनों के लिए अब पैदल फासला तय नहीं करना होगा। भैरव मंदिर से मुख्य मंदिर तक 3 किमी पैदल चढ़ाई दूरी पार करने में करीब 1 घंटा लगता है, जबकि हनुमान चट्टी के पास से रोपवे के जरिए मुख्य मंदिर की हवाई दूरी महज 1.5 किमी है, जिसे 10 मिनट में तय किया जाएगा। वक्त की बचत के अलावा पहाड़ पर चलने में अक्षम लोग, बड़े-बुजुर्ग, छोटे बच्चे और विकलांगों की भी दर्शन की हसरत आसानी से पूरी हो जाएगी।