जिला मुख्यालय और आसपास के इलाकों में लंबे समय से बरसात नहीं होने के कारण भयावह सूखे की स्थिति बनती जा रही है। बरसात के लिए जहां किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं, वहीं गेहूं की फसल नहीं उगने से खेत खलिहान सूने हैं तथा मौसमी सब्जियों की बागवानी पूरी तरह से चौपट हो गई है।
अवर्षण की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते पांच माह में जिले में केवल 13 मिलीमीटर ही बारिश हुई है। जिसमें अक्तूबर माह में सात एमएम तथा नवंबर में महज पांच एमएम बारिश शामिल है। कृषि और उद्यान विभाग की ओर से जिले भर में सर्वेक्षण कर विभिन्न फसलों और फलोत्पादन को हुए नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर जिले में कृत्रिम बरसात कराने के लिए दो दिनों से चल रहे अनूठे प्रयोग की सफलता का लोगों को इंतजार है।
जिले में बरसात के दो साल के आंकड़े
माह वर्ष 2014 (एमएम) वर्ष 2015 (एमएम)
जनवरी 76 92
फरवरी 62 21
मार्च 58 173
अप्रैल 07 73
मई 27 22
जून 32 298
जुलाई 590 392
अगस्त 98 146
सितंबर 20 00
अक्तूबर 82 07
नवंबर 00 05
दिसंबर 67 01
डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने किया मुआयना
दो दिन पूर्व स्थानीय पर्यटक आवास गृह में रेन मशीन से कृत्रिम बरसात कराने का औपचारिक शुभारंभ कर चुके डीएम दीपेंद्र चौधरी ने बुधवार को फिर से अनूठे प्रयोग स्थल का मुआयना किया। उन्होंने गुजरात से आए मोहन भाई और उनकी टीम के सदस्यों का हालचाल जानने के साथ ही प्रयोग की अब तक की प्रगति की जानकारी भी ली।
मेघराज मशीन को कमरे में बंद किया
सुरक्षा के लिहाज से मोहन भाई की मेघराज मशीन को कमरे में बंद कर दिया गया है, जिस कारण मशीन देखने के लिए पर्यटक आवास गृह में पहुंच रहे लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।