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स्वांला में आठ परिवारों को मकान खाली करने के नोटिस

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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्वांला में चोटी पर खतरे की जद में स्थित मकान। फोटो: संवा? - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। स्वांला की पहाड़ी में लगातार हो रहे भूस्खलन से ग्रामीणों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित स्वांला गांव पूरी तरह से खतरे की जद में है, जिसके बाद प्रशासन की ओर से स्वांला ग्राम पंचायत के टाक तोक में रहने वाले आठ परिवारों को मकान खाली करने के नोटिस जारी कर दिए हैं।
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प्रशासन की ओर से गांव में ड्रोन सर्वे करा खतरे की जद में आए परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की कवायद शुरू कर दी है। वहीं बाराकोट विकासखंड के च्यूरानी ग्राम पंचायत के मल्ली भारतोली तोक से भी लोगों को हटाया जा रहा है।
नायब तहसीलदार ज्योति धपवाल ने बताया कि चंपावत और बाराकोट विकासखंड के तीन तोकों में 45 परिवार रह रहे हैं। स्वांला में ड्रोन सर्वे करने के बाद तल्ली स्वांला और टांक तोक के आठ परिवारों के लिए अत्यधिक खतरा हो सकता है। इसलिए उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाने के नोटिस दे दिए गए हैं।
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इन परिवारों में स्वांला क्षेत्र के ईश्वरी दत्त, महादेव भट्ट, धर्मानंद, मोतीराम, प्रेमबल्लभ, चूड़ामणी, गिरीश चंद्र, कृष्णानंद शामिल हैं। मल्ली भारतोली में भी राम सिंह, पुष्कर सिंह, कल्याण सिंह, किशन सिंह, भवान सिंह, नारायण सिंह, बलवंत सिंह, पुष्पा देवी के मकानों को खतरा है। डीएम विनीत तोमर ने बताया कि प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में सघन निगरानी की जा रही है।
जीआईसी चंपावत में बनाया गया है राहत केंद्र
चंपावत। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्वांला के प्रभावित परिवारों को अन्यत्र भेजने के लिए जीआईसी चंपावत को राहत केंद्र बनाया गया है। एडीएम टीएस मर्तोलिया ने बताया कि किसी कारणवश राहत केंद्र में न रहने वाले ग्रामीणों को अन्यत्र सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। राहत केंद्र में प्रभावितों के रहने, खाने-पीने की समुचित व्यवस्थाएं की गईं हैं।
प्रभावितों को दो माह के किराए का भुगतान करेगा प्रशासन
चंपावत। एडीएम टीएस मर्तोलिया ने बताया कि विस्थापित किए जा रहे परिवारों को आगामी दो माह के लिए किराए का भुगतान जिला प्रशासन की ओर से किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आपदा मानकों के आधार पर प्रभावितों को मकान का किराया दिया जाएगा। उधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय ने बताया कि ड्रोन सर्वे के बाद स्वांला, भारतोली और सीम-चूका में भूगर्भीय सर्वेक्षण करने की संस्तुति की गई है।
प्रशासन को पूर्व में जानकारी देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
चंपावत। जिले के आपदा प्रभावित स्वांला गांव की स्थिति की जानकारी कई माह पूर्व जिला प्रशासन को देने के बाद भी समय रहते बचाव की कोई कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर रोष जताया। उनका कहना था कि बारहमासी सड़क बनने के बाद से ही स्वांला गांव में खतरा बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन और कार्यदायी संस्था की ओर से समय रहते कोई उपाय नहीं किए गए हैं। इससे अब ग्रामीणों को सर्वाधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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