चंपावत में डिप्टेश्वर झील के डूब क्षेत्र सीमांकन को लेकर आयोजित बैठक में मौजूद अधिकारी और ग्राम?
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चंपावत। चंपावत की डिप्टेश्वर झील के डूब क्षेत्र से प्रभावित लोग सात दिन तक आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ हुई सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक में बताया गया कि आपत्ति 18 जनवरी तक लोहाघाट के खंडीय कार्यालय में अधिशासी अभियंता के समक्ष दी जा सकेगी। ईई सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि डूब क्षेत्र में 1.90 हेक्टेयर निजी और चार हेक्टेयर नाप जमीन आ रही है। नाप जमीन के लिए मौजूदा सर्किल दर के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की इस घोषणा के बाद डिप्टेश्वर झील के सर्वे और अन्य कार्यों के लिए 20.53 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। विस्तृत प्रगति रिपोर्ट (डीपीआर) के लिए उच्चाधिकारियों से 63.45 लाख रुपये की मांग की गई है। डेढ़ किमी लंबी, 40 से 45 मीटर चौड़ी और 15 मीटर ऊंचाई वाली यह झील बनने से सिंचाई, पेयजल, पर्यटन बढ़ाने के साथ ही रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। सर्वे और अन्य बुनियादी कार्यों के बाद डूब क्षेत्र के सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद डूब क्षेत्र में आ रहे लोगों से वार्ता की गई। बैठक में एई कुंदन वन गोस्वामी, भुवन चंद्र पांडेय, एएई लक्ष्मण कुमार, जिलेदार हरिकिशन लाल टम्टा, डिप्टेश्वर मंदिर समिति के सचिव विक्रम खाती, भगवान सिंह, बीडी पांडेय, राहुल कुमार आदि थे।