चंपावत। जिले के लोहाघाट ब्लॉक के ज्यादातर गांवों को भारत नेट योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। नेपाल सीमा से लगे लोहाघाट ब्लॉक की कुछ ग्राम पंचायतें तो इस योजना से जुड़ी हैं, लेकिन योजना से एक भी ग्रामीण ने इंटरनेट का कनेक्शन नहीं लिया है।
चार ब्लॉक वाले चंपावत जिले में एक ब्लॉक लोहाघाट को डिजिटल बनाने के लिए चयनित किया गया। भारत नेट योजना के तहत इस ब्लॉक में सभी 67 ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ने के लिए पायलट प्रोजेक्ट पूरा भी हुआ लेकिन इसके तीन साल बाद भी न तो इन ग्राम पंचायतों में नेटवर्क की सुविधा है और न ही इन ग्राम पंचायतों को इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ा जा सका है।
देश की सभी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन जिले की हर ग्राम पंचायत तो दूर लोहाघाट ब्लॉक की ही ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड की सुविधा नहीं है। इसके तहत ब्लॉक की सभी 67 ग्राम पंचायतों को इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ा जाना था। इस योजना के क्रियान्वित होने से पंचेश्वर सहित नेपाल सीमा से लगे कई गांवों को भी लाभ मिलता लेकिन हाल ये है कि जिले के इकलौते डिजिटल गांव बगौटी को भी इसका फायदा नहीं मिल सका है। ग्राम प्रधान संगठन का कहना है कि दूर की ज्यादातर ग्राम पंचायतों में कनेक्टिविटी नहीं है। सभी पंचायतों में अभी कनेक्शन भी नहीं लग सके हैं।
कुछ ही पंचायतों में हैं कनेक्शन
चंपावत। डीपीआरओ रामपाल सिंह का कहना है कि लोहाघाट ब्लॉक की कुछ ही पंचायतों के पास ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं। काफी जगह अभी नेटवर्क की दिक्कत है। वैसे पंचायत घरों के ब्रॉडबैंड से जुड़ने से ग्रामीणों को कई लाभ होंगे। निर्माण, आवास योजनाओं के रिकॉर्ड के बेहतर रखरखाव से लेकर राशनकार्ड, परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र आदि कार्य गांव में ही हो जाएंगे। आधार कार्ड, बैंकिंग के काम भी ऑनलाइन हो जाएंगे।
भारत नेट योजना में शामिल लोहाघाट ब्लॉक की सभी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। कमजोर नेटवर्क वाली पंचायतों को चिह्नित कर मोबाइल नेटवर्क से जोड़ने की कार्रवाई की जाएगी। - नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
बस नाम का डिजिटल गांव है बगौटी
लोहाघाट (चंपावत)। डिजिटल इंडिया का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना इस जिले में कामयाबी से दूर है। इस योजना को इस जिले में जमीनी कामयाबी का इंतजार है। नेटवर्क की दिक्कत की वजह से जिले के पहले डिजिटल गांव बगौटी के बुरे हाल हैं। ऑनलाइन काम तो दूर, यहां सामान्य नेटवर्क भी ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं।
नेपाल सीमा से लगा 500 की आबादी वाला बगौटी गांव 26 अप्रैल 2019 में जिले का पहला डिजिटल गांव बना। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की डिजिटल ग्राम योजना के तहत लोहाघाट से 32 किमी दूर बगौटी को चंपावत जिले का पहला डिजिटल गांव घोषित किया गया है। गांव में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) का एक बोर्ड लगा दिया गया, लेकिन ग्रामीणों को तीन साल से अधिक बीतने के बावजूद डिजिटल गांव की सुविधा नहीं मिल पा रही है। डिजिटल गांव के क्रियान्वयन का काम गांव में स्थापित सीएससी कर रहा है। इसके तहत लोगों को बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, टेलीपैथी, टेलीमेडिसन, ऑनलाइन आवेदन आदि सुविधाएं दी जानी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नेट तो दूर, सामान्य रूप से बात करने लायक सिग्नल भी अक्सर नहीं रहते हैं। ऐसे में किस बात का डिजिटल गांव।
कोयाटी ग्राम पंचायत डिजिटल नहीं हो सकी है। उनके गांव में बीएसएनएल का कनेक्शन तो पहुंचाया गया है लेकिन वहां न कंप्यूटर हैं और न ही कोई अन्य सुविधाएं। - शिवराज बोहरा, प्रधान, कोयाटी।
सीमांत बगौटी गांव केवल कागजों में ही डिजिटल है। न कायदे का नेटवर्क है और न ही कोई ऑनलाइन काम होता है। - दीपा देवी, प्रधान, बगौटी।
डिजिटल गांव में ई-सुविधा से होने हैं सभी काम
डिजिटल गांव घोषित बगौटी में कई कार्य इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होने चाहिए। ग्रामीणों को पानी-बिजली के बिल जमा करने, आयुष्मान कार्ड बनाने, सेवायोजन पंजीकरण, तहसील से जारी होने वाले प्रमाणपत्रों के आवेदन समेत कैशलेस सिस्टम, नेटबैंकिंग, स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर-टैबलेट की सुविधा, वाईफाई आदि सुविधा मिलनी चाहिए लेकिन अभी इनमें से ज्यादातर की तो शुरुआत ही नहीं हो सकी है।
डिजिटल गांव में मिलेगी ये सुविधाएं
भीम एप, ई-वॉलेट सहित तमाम तरह के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन।
ई-बुक, ऑनलाइन एजुकेशन, टेलीमेडिसिन, टेलीपैथी की सुविधा।
निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण के जरिये 14 से 60 साल तक के लोगों को डिजिटल साक्षर करना।