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आशा कार्यकर्ताओं ने उठाई सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

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चंपावत में डब्लूएचओ की ओर से सम्मानित किए जाने पर आशा कार्यकर्ताओं ने जताई खुशी। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। आशा कार्यकर्ताओं ने उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग की नियमित कर्मचारी न होने पर भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी लगन, मेहनत के बल पर बेहतर काम, सामाजिक प्रतिबद्धता के लिए भारत की आशा कार्यकर्ताओं को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सम्मानित करने पर खुशी जताई।
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आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सम्मान ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने और देश में कोरोना महामारी के खिलाफ अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए दिया गया है। ऐसे में अब आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम वेतन और सरकारी कर्मचारियों का दर्जा देने, उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर उनके कामकाज की स्थिति सुधारने के लिए केंद्र की मोदी सरकार को तत्काल प्रभाव से केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रस्ताव पारित कर आशाओं को वास्तविक सम्मान देने की ओर बढ़ना चाहिए। आशा संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष रुक्मिणी जोशी, उपाध्यक्ष पुष्पा भट्ट, कोषाध्यक्ष हेमा जोशी आदि ने आशाओं के सम्मान पर खुशी जताई।
आंगनबाड़ी कर्मियों ने दिया सीएम को दिया ज्ञापन
पिथौरागढ़। आंगनबाड़ी कर्मियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर चार सूत्री मांगों को पूरा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार उनकी अनदेखी कर रही है। आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष दीपा पांडेय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सीएम को ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार आंगनबाड़ी कर्मियों की कानून सम्मत मांगों के प्रति उदासीन है जबकि सरकारी एजेंसियों के सर्वे बता रहे हैं कि आंगनबाड़ी की नियुक्ति के बाद मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों को सभी तरह की सामाजिक सुरक्षा, मिनी आंगनबाड़ी कर्मियों को कार्यकर्ताओं के समान मानदेय, आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री प्राइमरी का दर्जा देने, सुपरवाइजर पद पर प्रमोशन प्रक्रिया आदि मांगों को जल्द पूरा किया जाए। यहां हेमा धारियाल, दया पाठक आदि मौजूद रहीं।
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