टनकपुर(चंपावत)। उत्तराखंड परिवहन निगम के टनकपुर कार्यशाला में तकनीकी कर्मियों की कमी से बसों की मरम्मत में विलंब हो रहा है। सोमवार को भी कार्यशाला में मरम्मत के लिए 12 बसें खड़ी थीं। सीनियर फोरमैन ने बताया कि खराब बसों में हरिद्वार, हल्द्वानी, बरेली रूट की बसें हैं। नई बसें मिलने पर ही स्थिति ठीक हो सकेगी। रोडवेज प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में डिपो के पास कुल 85 बसों का बेड़ा है। इनमें 25 बसें अपना समय पूरा कर चुकी हैं, लेकिन इन बसों से काम लिया जा रहा है। इन बसों में 12 बसें 8 वर्ष और 8 लाख किमी दौड़ चुकी हैं, जबकि 13 बसें सात वर्ष पूरे होने का मानक पूरा कर चुकी हैं। वर्तमान में पहाड़ के रूट के लिए 10 और मैदान के लिए 15 बसों की आवश्यकता है।
सीनियर फोरमैन सुरेश चंद्र पांडेय ने बताया कि सबसे अधिक दिक्कत तकनीकी कर्मियों की कमी होना है। तकनीकी कर्मियों के 35 पदों में से मात्र 35 कर्मी तैनात हैं। इससे बसों की मरम्मत में एक दिन के बजाय दो-दो दिन लग रहे हैं। उन्होंने माना कि निकट भविष्य में नई बसें मिलने वाली हैं। इससे विभिन्न रूटों पर इन बसों का संचालन हो सकेगा। उन्होंने बताया कि तकनीकी कर्मियों की कमी दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर निरंतर मामला उठाया जा रहा है। बरहाल, तकनीक कर्मियों की कमी से बसों की मरम्मत में देरी से यात्रियों को दिक्कत होने की आशंका बनी हुई है।