भारत-नेपाल सीमा का विभाजन करने वाली महाकाली नदी के तट पर स्थित नगरूघाट का मेला पर्व स्नान के साथ संपन्न हो गया। मेले में सीमावर्ती क्षेत्र भारत व नेपाल दोनों देशों के बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।
रात भर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और महिला-पुरुषों की ओर से झोड़ों का गायन कर भगवान नागार्जुन की आराधना की गई। कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार को सूर्योदय से पहले त़ड़के श्रद्धालुओं ने पर्व स्नान कर भगवान नागार्जुन के दर्शन किए।
सोमवार देर रात सल्टा, बगोटी, जमरसों से देव रथ पहुंचे। वहीं सुनकुरी, लेटी, पासम, मजपीपल गांवों से आए देवरथ और जत्थे टार्चों, लालटेनों की रोशनी में मंदिर पहुंचे जहां उन्होंने बारी-बारी से मंदिर की परिक्रमा की। बगोटी के देव डांगर जयदत्त पांडेय, सल्टा के गंगा दत्त पांडेय, जगदीश पांडेय, जमरसों के तेज सिंह में नागार्जुन देवता अवतरित हुए जिन्हें श्रद्धालु कंधों पर बैठाकर मंदिर में लाए।
मुख्य अतिथि महेंद्र ढेक, विशिष्ट अतिथि भाजयुमो जिलाध्यक्ष मोहित पाठक रहे। मेले में भारत और नेपाल से बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने भगवान नागार्जुन देवता का आशीर्वाद प्राप्त कर पर्व स्नान किया। पुरुषों, महिलाओं की ओर से रात भर झोड़ों का गायन किया गया। मंगलवार को महाकाली नदी के तट पर मेला लगाया गया।
मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष जगदीश कलौनी और डॉ. सतीश पांडेय के नेतृत्व में पिथौरागढ़ से आई प्रकाश रावत एंड पार्टी के कलाकारों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मेले में शांति, सुरक्षा के लिए पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त किया गया था। आयोजन समिति सचिव भुवन भट्ट, विक्रम सामंत, कमल बोहरा, रमेश चंद, बद्री सिंह सौन, चंद्रकांत तिवारी, राजपाल सामंत, महेश राम, खष्टीबल्लभ पांडेय आदि ने सभी का स्वागत किया।
नगरूघाट मेले में नागार्जुन देवता को मंदिर की परिक्रमा कराते श्रद्धालु।- फोटो : LOHAGHAT