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सूखीढांग में भोजनमाता को हटाने पर पूर्व सीएम रावत ने राज्य सरकार को लिया आड़े हाथ

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हरीश रावत। पूर्व सीएम उत्तराखंड। - फोटो : PITHORAGARH
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टनकपुर (चंपावत)। सूखीढांग राजकीय इंटर कॉलेज में भोजनमाता विवाद को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दु:खद बताते हुए राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि ऐसी दुखद घटना वाला हमारा उत्तराखंड नहीं हो सकता। ये भाजपा का ही उत्तराखंड हो सकता है, जहां एक भोजनमाता को केवल इसलिए हटा दिया जाए क्योंकि वह एक वर्ग विशेष की है।
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सोशल मीडिया पर वायरल अपने वीडियो संदेश में पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि अखबार में मन को उत्तेजित करने वाला एक दु:खद समाचार पढ़ा। 21वीं सदी में इस मानसिकता के साथ यदि उत्तराखंड चल रहा है तो ये बहुत दु:खद है। राज्य सरकार ने एक भोजनमाता को केवल इसलिए हटा दिया क्योंकि वह अनुसूचित जाति परिवार की थी। हरीश रावत ने राज्य सरकार से क्षमा मांगते हुए हटाई गई भोजनमाता को बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार चेती नहीं तो वह गांधी की मूर्ति के सामने अनशन पर बैठेंगे।
मेडिकल कॉलेज की निविदा प्रक्रिया को लेकर पूर्व सीएम ने उठाए सवाल
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए की जा रही निविदा प्रक्रिया को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने फेसबुक पेज के माध्यम से नियम परिवर्तित करने के आरोप लगाए हैं।
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पूर्व सीएम हरीश रावत का कहना है कि खुशी की बात है कि पिथौरागढ़ में मेडिकल कॉलेज की कार्रवाई आगे बढ़ी है। पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज के निर्माण के टेंडर जारी होने जा रहे हैं मगर चिंता का विषय यह है कि जिस कंपनी को यह काम सौंपा गया है, वह किसी एक कंपनी विशेष को फेवर करने के लिए बीडर्स की संख्या घटा रही है, ताकि कंपीटीशन न हो सके।
उन्होंने कहा कि नियम ऐसे बनाए जा रहे हैं, जो एक कंपनी विशेष के पक्ष में हों। उनका कहना है कि शुरुआत से ही एक बड़ा घोटाला जन्म ले रहा है। यह सरकार के बिना या उच्च पदस्थ लोगों के बिना यह काम संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले को-ऑपरेटिव में नियुक्तियों में धांधली हुई है।
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