चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्वाचन क्षेत्र वाले चंपावत जिले को उत्तराखंड के ऊर्जा केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा। आईआईपी (भारतीय पेट्रोलियम संस्थान) इस काम को अंजाम देगा। आईआईपी पिरूल का उपयोग ईंधन के रूप में करने के लिए छोटे-छोटे ब्लॉक बनाएगा। साथ ही च्यूरा (वनस्पति) से बायो डीजल बनाने पर भी काम करेगा।
वैज्ञानिक डॉ. पंकज आर्य बताते हैं कि पिरूल से बना कोयला कार्बन उत्सर्जन रहित होने के साथ लोगों की आय का जरिया भी बन सकेगा। चंपावत में 27,292 हेक्टेयर क्षेत्र में चीड़ के जंगल होने के अलावा च्यूरा भी प्रचुर मात्रा में है। पिरूल के उपयोग से जंगल की आग में भी कमी आएगी। इसके लिए संस्थान ने पहले चरण में चंपावत ब्लॉक के 10 गांवों का चयन किया है।
आदर्श जिला बनाने के लिए नामित नोडल एजेंसी उत्तराखंड विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (यूकोस्ट) के डीजी दुर्गेश पंत का कहना है कि चीड़ के पत्तों पर आधारित ऊर्जा निर्माण के अलावा खेती, कृषि आधारित उद्यमिता, किसान सभा मोबाइल एप्लिकेशन, स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। संवाद
ये काम होंगे
चीड़ आधारित उन्नत दहन प्रणाली विकसित कर 10 गांवों के 100 लाभार्थियों का कौशाल विकास।
स्थानीय जैव संसाधन पर संचालित बायो-डीजल उत्पादन।
बागवानी संसाधन (अदरक, नाशपाती और चाय) के रोजाना औसतन 100 किलो उत्पादन के लिए न्यूनतम सुविधा केंद्र की स्थापना।
पुष्प अगरबत्ती बनाने के लिए 10 स्वयं सहायता समूह के साथ क्रियान्वयन।
किसानों और कृषि उद्यमियों के 10 एफपीओ के लक्ष्य के साथ ब्लॉक में किसान सभा मोबाइल एप बनाना।
स्थायी मूल्य श्रृंखला और बाजार संपर्क की स्थापना।
जिज्ञासा कार्यक्रम का चंपावत ब्लॉक के 10 सरकारी स्कूलों में क्रियान्वयन।
चयनित किए गए हैं ये 10 गांव
ढकना बडोला, बाजरीकोट, डड़ा बिष्ट, सिमल्टा, अमकड़िया, लफड़ा, सुयालखर्क, कोयाटी, चैकुनीबोरा और मुड़ियानी।
चंपावत को आदर्श स्वरूप देने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है। शिक्षा, स्थानीय जरूरत के अनुरूप कौशल विकास, खेती, उद्यमित सहित जिले के आधारभूत ढांचे को सशक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। समग्र और गांव केंद्रित विकास के लिए वैज्ञानिक संस्थाओं की मदद ली जा रही है। - प्रोफेसर दुर्गेश पंत, महानिदेशक, यूकोस्ट, देहरादून।