चंपावत में रोड की हालत खस्ता है, रेल मार्ग टनकपुर से आगे नहीं है और हवाई सफर हवा में ही लटका है। दो पड़ोसी जिलों ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ में हवाई सफर तेजी से आगे बढ़ रहा है पर मैदान और पहाड़ से मिलकर बने इस जिले में हवाई यात्रा को लेकर अभी पहला कदम तक नहीं उठाया जा सका है। हवाई पट्टी तो छोड़िए, हेलीपेड तक अभी नहीं है।
ऊधम सिंह नगर के पंतनगर से हवाई यात्राएं होती है। वहीं, पिथौरागढ़ से यह जल्द ही शुरू होने वाला है, लेकिन सितंबर 1997 में सृजित चंपावत जिले में हवाई पट्टी की दूर-दूर तक कोई संभावना फिलहाल नहीं है, जबकि 90 किलोमीटर नेपाल सीमा से लगा यह जिला संवेदनशील भी है। जिला प्रशासन का कहना है कि फिलहाल जिले में हवाई पट्टी का कोई प्रस्ताव नहीं है।
नेपाल सीमा से लगे चंपावत में हवाई सेवा शुरू होने से इस खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र के पर्यटन को प्रोत्साहन मिलता। यह क्षेत्र न केवल मुख्य धारा से जुड़ सकेगा, बल्कि इसका लाभ यहां की समूची कारोबारी गतिविधियों को भी मिलेगा। उधर, दर्जा कैबिनेट मंत्री हेमेश खर्कवाल का कहना है कि इस वक्त हेलीपेड का काम पूरा कराना प्राथमिकता है। इसके पूरा होने के बाद जिले से हवाई सफर शुरू करने के लिए पहल की जाएगी।
शुरू हुआ हेलीपेड का काम
जिले में हेलीपेड का सपना 2016 तक पूरा हो सकता है। हेलीपेड के लिए जमीन समतलीकरण का काम दो दिन पूर्व शुरू हो गया है। इस हेलीपेड में 2 चौपड़ और 1 एम-17 जहाज तीनों एक साथ उतर सकेंगे। जिला आपदा नियंत्रण अधिकारी मनोज पांडेय ने बताया कि हेलीपेड का उपयोग आपदा से लेकर वीआईपी मूवमेंट और दूसरी गतिविधियों के लिए होगा। सर्किट हाउस से करीब 400 मीटर दूर वाली 0.20 हेक्टेयर जमीन को हेलीपेड के लिए नागरिक उड्डयन निदेशालय ने 2011 में हरी झंडी दी थी। उत्तराखंड इमरजेंसी असिस्टेंस प्रोजेक्ट के तहत शुरू इस परियोजना को छह माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। टनकपुर के एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने बताया कि श्रीपूर्णागिरि तहसील के बनबसा के अलावा डैसली और देवीधुरा में हेलीपेड प्रस्तावित किए गए हैं।
फिलहाल खेल मैदान है अस्थायी हेलीपेड
इस वक्त किसी भी विशिष्ट मेहमान के आने पर गोरलचौड़ मैदान को अस्थायी हेलीपेड बनाया जाता है। इससे न केवल खेल मैदान की हालत बिगड़ती है, बल्कि प्रतिकूल असर भी पड़ता है।