करीब डेढ़ माह पहले चंपावत में कालाजार रोग के लक्षण मिलने से सनसनी मच गई। मायावती अद्वैत आश्रम के धर्मार्थ अस्पताल के डॉक्टरों ने कालाजार की आशंका जताई थी, मगर जांच के बाद इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
अमौन गांव की दस साल की एक बालिका अक्तूबर में इलाज के लिए मायावती आश्रम के धर्मार्थ अस्पताल लाई गई। लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों को कालाजार होने का संदेह हुआ। जांच के लिए नमूने रुड़की भेजे गए। आश्रम के अस्पताल ने मामले की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.विनोद टोलिया ने बताया कि कालाजार के अंदेशे में अमौन और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजा गया था। इन गांवों में सर्वे करने पर कालाजार के कोई लक्षण नहीं मिले। जिला सर्विलांस अधिकारी डा.आरके जोशी और डा.मुबारक अली ने बताया कि रुड़की की प्राइवेट प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट में कालाजार की पुष्टि नहीं हुई। मामले की संदिग्धता के चलते स्वास्थ्य विभाग ने नवंबर के शुरू में मरीज को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर करते हुए उच्चस्तरीय जांच की संस्तुति की थी।
क्या है कालाजार रोग
कालाजार रोग में श्वेत रक्त कणिका (डब्ल्यूबीसी), लाल रक्त कणिका (आरबीसी), प्लेटलेट्स में गिरावट की वजह से खून का बनना कम हो जाता है। डा.मुबराक अली का कहना है कि कालाजार संक्रामक रोग है, लेकिन चंपावत जिले में ऐसा एक भी केस नहीं मिली। इसमें या तो मरीज यहां से कालाजार ग्रस्त क्षेत्र में जाएं या वहां के मरीज ने किसी को संक्रमित किया हो। कालाजार के रोगी मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पश्चिमी बंगाल के अलावा पूर्वी उप्र में मिले हैं।