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भोजनमाता नियुक्ति मामला : पहली भोजनमाता को हटाने में एसएमसी ने नहीं किया नियमों का पालन

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चंपावत। सूखीढांग जीआईसी की भोजनमाता नियुक्ति विवाद को 2021 के अंतिम दिन सुलझा लिया गया और अनुसूचित जाति की सुनीता देवी को नियमों के तहत दूसरी भोजन माता के रूप में तैनाती मिली। छठी से आठवीं कक्षा तक के 66 छात्र-छात्राओं के लिए पहले से ही एक भोजनमाता विमलेश उप्रेती कार्यरत हैं। वहीं सीईओ आरसी पुरोहित के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति डीएम को रिपोर्ट सौंप चुकी है।
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डीएम विनीत तोमर ने बताया कि रिपोर्ट के मुताबिक अक्तूबर में हटाई गई भोजनमाता शकुंतला देवी के मामले में प्रक्रिया के पालन में कोताही बरती गई। इसके बाद नई भोजनमाता की तैनाती में भी समिति ने अनुमन्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया। डीएम ने कहा कि जांच रिपोर्ट के बाद जरूरी कार्रवाई और स्पष्टीकरण के लिए शिक्षा विभाग को नियमानुसार कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। जांच समिति के दो अन्य सदस्य एपीडी विम्मी जोशी और अब स्थानांतरित हो चुके जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिखारी राजेश कुमार थे।
प्रधानाचार्य प्रेम सिंह का कहना है कि शकुंतला को हटाने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, बल्कि समिति ने ये निर्णय लिया था। इसी तरह नई तैनाती में समिति द्वारा निर्णय लिए जाने के बाद नाम को उप शिक्षाधिकारी के अनुमोदन के लिए भेजा गया था।
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शुक्रवार को दुरुस्त की गई प्रक्रिया
टनकपुर (चंपावत)। वर्ष 2021 के अंतिम दिन शुक्रवार को सूखीढांग जीआईसी में भोजनमाता नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया खामी को दूर किया गया। एसएमसी (स्कूल प्रबंधन समिति) और पीटीए (अभिभावक-शिक्षक संघ) की बैठक में शकुंतला देवी को हटाए जाने का प्रस्ताव पारित कर प्रक्रिया की तकनीकी खामी होने से इसे दुरुस्त किया गया। शकुंतला ने अक्तूबर में कार्य करने में असमर्थता जताते हुए प्रधानाचार्य को पत्र भेजा था। इसके बाद नियमों के तहत अनुसूचित जाति की सुनीता देवी का चयन भोजनमाता के रूप में किया गया। साथ ही इसे अनुमोदन के लिए उप शिक्षाधिकारी कार्यालय भेज दिया गया है।
दो सप्ताह का शीतावकाश
चंपावत। सूखीढांग जीआईसी में पहली जनवरी से दो सप्ताह का शीतावकाश हो गया है। प्रधानाचार्य प्रेम सिंह ने बताया कि पहली जनवरी से 14 जनवरी तक विद्यालय में जाड़ों की छुट्टी रहेगी। 15 जनवरी को फिर से विद्यालय खुलेगा।
जिले में 53 एससी, छह एसटी और 49 ओबीसी जाति की भोजनमाताएं
चंपावत। सूखीढांग जीआईसी में एमडीएम (मध्याह्न भोजन योजना) को लेकर हुआ विवाद अपनी तरह का जिले का पहला मामला रहा। यहां एससी जाति की भोजनमाता द्वारा बनाए भोजन को सवर्ण छात्र-छात्राओं द्वारा नहीं खाने का मामला छाया रहा। मामले के सुलझने के साथ ही जांच भी पूरी हो चुकी है। अब समाज के जागरूक लोग इस तरह की घटनाएं फिर आगे से न हो, इसके लिए समाज को जागरूक करने की मुहिम चलाने की बात कह रहे हैं।
पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं के लिए सरकारी स्कूलों में एमडीएम की व्यवस्था है। वैसे चंपावत जिले में 957 भोजनमाताओं में से 53 भोजनमाताएं अनुसूचित जाति की हैं। उन स्कूलों में किसी सवर्ण छात्र-छात्रा द्वारा भोजन नहीं करने का मामला सामने नहीं आया। इसके अलावा छह भोजनमाताएं एसटी और 49 ओबीसी जाति की है। सवर्ण जाति की 849 भोजनमाताएं हैं। एमडीएम प्रभारी मनीष ने बताया कि जिले में 681 स्कूलों में कुल 21802 छात्र-छात्राएं इस योजना का लाभ ले रहे हैं।
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