चंपावत के काष्ठ कलाकार टीकाराम भट्।
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चंपावत। उम्र के पड़ाव पर पहुंचने के बाद अमूमन लोगों को अपने दैनिक काम निपटाने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है मगर चंपावत जिले के अमोड़ी निवासी 80 वर्षीय वृद्ध टीकाराम भट्ट कांपते हाथों से बेकार पड़ीं लकड़ियों में जान फूंक दे रहे हैं। टीकाराम काष्ठ कला को नई ऊंचाइयां प्रदान कर रहे हैं।
टीकाराम भट्ट बेकार पड़ी लकड़ियों को तराशने में माहिर हैं। उन्होंने काष्ठ कला के लिए किसी प्रकार का प्रशिक्षण नहीं लिया है। वह अब तक शेर, भालू, हाथी, मोर सहित तमाम जानवरों की आकृतियां बनाकर अधिकारियों को भेंट कर चुके हैं। उद्योग विभाग की ओर से उन्हें हस्तशिल्प वर्ग में पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। टीकाराम भट्ट बिना किसी प्रशिक्षण के स्वयं के अनुभव के आधार पर कुर्सी, मेज, चारपाई और अन्य फर्नीचर तैयार कर रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव में पहुंचने के बाद भी युवाओं को मात देते हुए नियमित 25 किमी की दूरी तय कर अमोड़ी से चंपावत तक का सफर तय करते हैं। उनकी बनाई गई आकृतियों को लोग हाथों हाथ लेते हैं। टीकाराम अपने हाथों से तैयार की गई कलाकृतियों को विभिन्न विभागों के अधिकारियों को भेंट कर चुके हैं।
बाक्स उद्योग विभाग ने किया है हस्तशिल्प उद्यमी में नामित
चंपावत। बुजुर्ग टीकाराम की ओर से काष्ठकला और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के प्रयासों को उद्योग विभाग ने भी हाथों हाथ लिया है। उद्योग विभाग की ओर से टीकाराम की ओर से तैयार की गई आकृतियों को हस्तशिल्प की पुरस्कार की श्रेणी में शामिल किया गया है।