राज्य सरकार की ओर से लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने के तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बिल्कुल उल्टी है। इसकी बानगी एएनएम केंद्र भुम्वाड़ी को देखने से मिलती है, जहां बृहस्पतिवार को जनप्रतिनिधियों के निरीक्षण किए जाने पर केंद्र में ताला लटका मिला।
यहां एएनएम केंद्र के भवन के निर्माण पर लाखों रुपये व्यय हुए हैं, इस केंद्र के माध्यम से भुम्वाड़ी समेत करौली, बिंगराकोट, कूंण आदि गांव के लोगों को चिकित्सकीय सुविधा दी जाती है, लेकिन यहां तैनात एएनएम, फार्मेसिस्ट दोनों ही माह में एक बार केंद्र का कपाट खोलते हैं। शेष दिनों कहां रहते हैं, इसका किसी को पता नहीं रहता।
ग्राम प्रधान शोभा देवी, कूंण के त्रिलोक सिंह, बिंगराकोट के पन राम, करौली की चंद्रकला जोशी, भुम्वाड़ी के उर्वादत्त, बिंगराकोट के लक्ष्मी दत्त जोशी, खिलानंद आदि लोगों का कहना है कि एएनएम केंद्र न खुलने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जो बच्चे तथा गर्भवती महिलाएं उनके आने के दिन यहां नहीं आ पाती हैं, उन्हें एक महीने का फिर और इंतजार करना पड़ता है।
राष्ट्रीय कार्यक्रम भी यहां प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी इस ओर मुंह फेरे हैं। गांव के जीवन चंद्र, रमेश चंद्र, भोला दत्त, उमेश नाथ, रंजीत सिंह, सावित्री देवी, महेश चंद्र, चंद्रकला, मुकेश कुमार ने एएनएम केंद्र को नियमित खोलकर लोगों को सरकार प्रदत्त सुविधाएं देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने व्यवस्था सुचारु न होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी है।
आदेशों की अवहेलना पर होगी कार्रवाई
प्रभारी चिकित्साधिकारी डा.आभाश सिंह का कहना है कि उनके पास पहले भी इस केंद्र की शिकायतें आई थी, जिसके लिए दोनों कर्मचारियों को कड़े निर्देश दे दिए गए थे, यदि उनके आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जनता के हितों की किसी भी सूरत पर अनदेखी नहीं की जा सकती।