कोरोना काल में घर में रहे छोटे बच्चों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्कूल की पढ़ाई छूटी, तो सीखने-सिखाने की प्रक्रिया की कड़ी टूटने से सामूहिकता के बोध में कमी आ गई। ऑनलाइन पढ़ाई से आंखों में दिक्कत, चिड़चिड़ापन सहित कई परेशानियां हुईं। ऐसे में कोरोना के बाद कुछ स्कूलों में पढ़ाई शुरू होने पर बच्चों के मनोभाव को बदलकर सकारात्मकता के लिए नई पहल की। जूनियर हाईस्कूल फोर्ती में हुई ऐसी पहल में पढ़ाई से ज्यादा जोर खेल, योग आदि गतिविधियों में दिया गया। उसका असर भी धीमे-धीमे नजर आया।
कोरोना के कारण सवा साल से अधिक समय तक स्कूल बंद रहे। इससे बच्चों का उत्साह गायब हो गया लेकिन फोर्ती स्कूल ने इस समस्या को योग के जरिये दूर किया। 25 छात्र-छात्राओं वाले जूनियर हाईस्कूल फोर्ती में पढ़ाई के साथ योग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। प्रधानाध्यापक और योग के माहिर लक्ष्मण सिंह मेहता ने स्कूल शुरू होने से पहले और छुट्टी के बाद दो वक्त योगाभ्यास करा कई खेल गतिविधियां कराईं। बच्चों के लिए उपयोगी आसन, जॉगिंग, सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, हस्तपादासन, त्रिकोणासन, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी आदि आसन कराए गए।
योग से बच्चों की नकारात्मकता दूर हुई। उदासीनता कम होने के साथ वे फिर से जोश से भर गए। अब पढ़ाई और अन्य सहगामी गतिविधियों को उत्साह से कर रहे हैं।
- लक्ष्मण सिंह मेहता, प्रधानाध्यापक, फोर्ती।
लंबे वक्त तक घर में रहने से स्कूल जाने और नियमित पढ़ाई की आदत छूट गई थी लेकिन स्कूल के बदले माहौल से फिर से स्कूल जाने में उत्साह आने लगा। -
शिवानी, छात्रा।
पढ़ाई के साथ योग ने स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया। अब वे घर और स्कूल दोनों जगह पढ़ भी रहे हैं और अन्य काम भी कर रहे हैं। -
शिवम शर्मा, छात्र।
कोरोना काल की चुनौतियां के बीच स्कूल जाना शुरू में सिरदर्द जैसा रहा, लेकिन स्कूल में सिखाए जाने वाले योग ने स्कूल से दूरी घटा दी। -
निहारिका पुनेठा, छात्रा।