चंपावत। लगभग दो दशक पहले जिले के पाटी विकासखंड के कई गांवों में महीनों तक तेंदुए की दहशत थी। खौफ का पर्याय बने आदमखोर तेंदुए को जान जोखिम में डालकर अचूक निशाना लगाकर ढेर करने वाले शिकारी रतन सिंह ने क्षेत्र वासियों को राहत पहुंचाई थी लेकिन शासन से मिलने वाली पुरस्कार राशि प्रशासनिक उपेक्षा के चलते उन्हें अब तक नहीं मिली है। इससे वह वह खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
करीब 19 पूर्व वर्ष 2004 में प्रशासनिक आदेश के चलते कोटना गांव के शिकारी रतन सिंह ने अपनी जान जोखिम में डालकर आदमखोर तेंदुए का शिकार कर उसे मौत के घाट उतारा था। उनका कहना है कि जिला प्रशासन की घोषणा के बावजूद उन्हें इनाम नहीं दिया गया जिसको लेकर वह खफा हैं। उन्होंने बताया कि वे 20 साल पहले मिले दस्तावेजों को इसी उम्मीद में संभाले हुए हैं कि कभी तो कोई अधिकारी उनके साथ न्याय करेगा। इधर करीब 80 की उम्र में पहुंच चुके रतन सिंह लंबे समय से बीमार चल रहे हैं लेकिन कोई सुध लेने वाला कोई नहीं है। संवाद
ये था मामला
वर्ष 2004 में पाटी विकासखंड में आदमखोर तेंदुए ने दो लोगों सहित दर्जनों मवेशियों को अपना शिकार बनाया था। इसके अलावा क्षेत्र के 20 से ज्यादा लोगों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था। ग्रामीणों की ओर से एसडीएम के घेराव करने के बाद प्रभागीय वनाधिकारी ने कोटना गांव निवासी रतन सिंह को शिकारी नियुक्त किया था। शिकारी रतन सिंह ने दो माह तक जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाकर आखिरकार नरभक्षी तेंदुए को ढेर कर दिया था। उस समय जिला प्रशासन ने शिकारी रतन सिंह को 50 हजार और वन विभाग ने 25 हजार का इनाम देने की घोषणा की थी लेकिन यह घोषणा आज तक पूरी नहीं हो सकी।
कोट
मामला 20 साल पुराना है इसलिए इस संबंध में कुछ भी कहना उचित नहीं होगा। शिकारी रतन सिंह अपने सभी जरूरी दस्तावेज विभाग को उपलब्ध करा दें। दस्तावेजों की जांच करने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। - आरसी कांडपाल, डीएफओ, चंपावत।
कोट
मामला काफी पुराना है। अगर शिकारी रतन सिंह अगर अपने सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराते हैं तो उन्हें देखने के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है। - हेमंत कुमार, एडीएम चंपावत।