चंपावत। कम्युनिटी एक्शन थ्रू मोटिवेशन प्रोग्राम (कैंप) द्वारा संचालित आपात चिकित्सा सेवा 108 एंबुलेंस की लोकेशन को लेकर अब किसी तरह की दुविधा नहीं रहेगी। एंबुलेंस के लिए कॉल करने वाला व्यक्ति इस एंबुलेंस की लोकेशन को जान सकेगा। इससे इमरजेंसी में मरीज और उसके तीमारदार को एंबुलेंस के पहुंचने का सही वक्त पता चल सकेगा।
ये सेवा चंपावत की 108 एंबुलेंस में शुरू हो गई है।
कैंप संस्था के चंपावत जिला समन्वयक भास्कर शर्मा ने बताया कि किसी मरीज या तीमारदार द्वारा कॉल करने पर एंबुलेंस के चालक और इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन (ईएमटी) का नाम और उनका मोबाइल नंबर कॉल करने वाले के मोबाइल फोन पर आ जाएगा। इससे तीमारदार एंबुलेंस के मरीज के पास पहुंचने तक स्टाफ से संपर्क कर फोन से भी सलाह ले सकेगा।
साथ ही कॉलर को जीपीएस (ग्लोबल पॉजिशनिंग सिस्टम) के जरिए एंबुलेंस की लोकेशन का भी पता चल सकेगा। इस लोकेशन से तीमारदार यह जान सकेगा कि एंबुलेंस को पहुंचने में कितना समय लग सकेगा।
प्रसूताओं को नहीं मिल पा रही खुशियों की सवारी
चंपावत। जिले में एक मई से प्रसूताओं को खुशियों की सवारी (केकेएस) नहीं मिल पा रही है। इसके स्थान पर अभी तक कोई वैकल्पिक उपाय भी नहीं किया गया है। इसके चलते प्रसूता महिलाओं को मिलने वाली वाहन की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि एक मई से अब तक 19 शिशुओं ने जन्म ले लिया है। अब केकेएस का जिम्मा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को दिया जा रहा है लेकिन इसके लिए एक प्रसव पर औसतन 450 रुपये का मामूली बजट ही दिया जाएगा जिससे प्रसूता को दी जाने वाली सुविधा पर असर पड़ना तय है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि प्रसूताओं को घर पहुंचाने के लिए एनएचम के जरिए बजट दिया गया है। 2019-20 के लिए जिले में 1645 प्रसवों के लिए करीब 8.01 लाख रुपये दिए गए हैं। चंपावत जिले की चंपावत, लोहाघाट और टनकपुर की केकेएस अब तक खड़ी है।