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....झगड़ते राजनेता हैं ध्वजारोहण कराने को

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चंपावत। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चेतना मंच की ओर से यहां आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों और रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से व्यवस्था पर प्रहार किए। पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसएस भंडारी की अध्यक्षता में हुई काव्य गोष्ठी का शुभारंभ संस्कृत के विद्वान कवि डॉ. कीर्तिबल्लभ सक्टा ने किया।
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पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. बीसी जोशी ने कहा ‘सरे बाजार गलियों में, झगड़ते राजनेता हैं ध्वजारोहण को’। कवयित्री अंजू पांडेय ने अपनी कल्पना को यूं जमीन पर उतारा ‘कल्पना नहीं हकीकत की बात करती हूं, ख्वाहिशें कई पाने की चाह रखती हूं’। साहित्यकार प्रकाश जोशी शूल ने कहा ‘खुशियों को जी, जब तक जीवन है, गमों को पी’। प्रशासनिक अधिकारी रामप्रसाद आर्य ने कहा ‘है गरीबी या अमीरी, ये तो अपना भाग्यलेखा’। कवयित्री मीनू जोशी ने कहा ‘मोहब्बत जिंदगी जीने की एक तहजीब होती है, कहीं रांझा सी, कहीं पर हीर होती है’। स्वाति जोशी ने कहा ‘करो यूं ही मुझे स्वीकार, यदि सचमुच हो मुझसे प्यार, मत करो ये अत्याचार, मुझे मुझसा रहने दो, मुझे खुद सा रहने दो’। बीएड विभाग की सरोज यादव के बोल थे ‘बड़ी कीमत अदा की तुम्हें खोके हमने, मनाई हैं खुशियां बहुत रोके हमने’। मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष प्रकाश तिवारी ने कवियों का उत्साह बढ़ाया। गोष्ठी में कवि मयंक भट्ट, गजलकार योगेश पुनेठा, हरिनंदन जोशी, युवा कवि हर्षित पांडेय, शिक्षक फणींद्र कुमार पांडेय पीके, साहित्यकार जेपी यादव मनुज, डॉ. तिलकराज जोशी, पुष्कर सिंह बोहरा, डॉ. विष्णु दत्त शास्त्री सरल, राजीव श्रीवास्तव, नवीन पंत, डॉ. अजय कुमार रस्तोगी, डॉ. सतीश पांडेय, लता खर्कवाल, योगेश जोशी आदि ने भी काव्यपाठ किया।
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