चंपावत। जिला मुख्यालय के शहरी क्षेत्र में अब तक किराए अथवा दूसरों के मकानों में रह कर जीवन यापन कर रहे परिवारों के अपने खुद के आवास की परिकल्पना जल्द ही साकार रूप ले सकेगी। प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभार्थी अनुदान आधारित योजना के तहत 243 आवासों के निर्माण की स्वीकृति मिलने के साथ ही एक करोड़ 45 लाख रुपये की धनराशि भी शासन स्तर पर अवमुक्त कर दी गई है।
राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) के सिटी मैनेजर महेश चौहान ने बताया कि पीएम आवास योजना के तहत टोकन मनी जारी होने के साथ ही संबंधित लाभार्थियों की जमीन के भौतिक सत्यापन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। भौतिक सत्यापन के साथ ही संबंधित जमीन की जीओ टैगिंग की प्रकिया के बाद लाभार्थी के साथ अनुबंध (बांड) किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अनुबंध के बाद लाभार्थियों को आवास निर्माण के लिए पहली किश्त के रूप में 20 हजार रुपये की धनराशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी 243 आवासों के निर्माण में कुल 4.86 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
वर्ष 2022 तक सभी को आवास का लक्ष्य
चंपावत। सूडा के सिटी मैनेजर महेश चौहान के अनुसार शहरी क्षेत्रों में वर्ष 2022 सभी के लिए आवास के उद्देश्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना सबके लिए आवास (शहरी) योजना जुलाई 2017 से शुरू की गई है। जिसके तहत वर्ष 17 जून 2015 से शहरी क्षेत्र में निवास करने वाले सभी आवासहीन लोगों को वर्ष 2022 तक आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पीएम आवास योजना में परिवार की परिभाषा
चंपावत। राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) के सिटी मैनेजर महेश चौहान के अनुसार पीएम आवास योजना के अनुसार लाभार्थी परिवार की परिभाषा में पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल होंगे। जबकि आय अर्जित करने वाले वयस्क सदस्य को वैवाहिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना अलग परिवार के रूप में माना जाएगा।
तीन स्तरों पर किया जाना है आवासों का निर्माण
चंपावत। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार के अनुसार योजना के तहत आवासों का निर्माण तीन स्तरों में किया जाना है। जिसमें निजी सहभागिता के आधार पर मलिन बस्ती आवास के लिए एक लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। इसके अलावा ऋण आधारित अनुदान प्रोत्साहन लाभ के तहत नया आवास निर्माण, क्रय अथवा वृद्धि के लिए छह लाख रुपये तक का ऋण अधिकतम 20 वर्ष तक उपलब्ध कराया जाएगा। जिसमें 6.5 प्रतिशत का ब्याज अनुदान सब्सिडी के रूप में मिलेगा। इसके अलावा लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण के लिए स्वयं के मालिकाना हक की भूमि पर नया आवास बनाने अथवा मकान को बढ़ाने के लिए भी दो लाख रुपये तक का अनुदान देेने का प्रावधान है।