सेना के जवान राइफलमैन मयंक देवली का पार्थिव शरीर बुधवार को गौचर पहुंचने पर परिवार में कोहराम मच गया। रोते बिलखते परिजनों को देखकर वहां एकत्र लोगों की आंखें भी नम हो गई। सुबह करीब 10 बजे उन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
राइफलमैन मयंक देवली (26) का बीते सोमवार को देर शाम मेरठ आर्मी कैंप में आकस्मिक निधन हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को लेकर आए सैन्य अधिकारी नायब सूबेदार राजेंद्र सिंह के अनुसार रात्रि भोजन के बाद अचानक तबियत बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए सैन्य अस्पताल में भर्ती किया गया था। जहां उन्होंने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उनकी मौत हार्ट अटैक से होने की संभावना जताई जा रही है। मयंक देवली चार साल पहले गढ़वाल राइफल की द्वितीय बटालियन में भर्ती हुए थे और वर्तमान में 32 इन्फैंट्री ब्रिगेड मेरठ में तैनात थे। बुधवार सुबह आठ बजे जैसे ही उनके पार्थिव शरीर को घर पर लाया गया। पैतृक घाट शिवानंदी में रुद्रप्रयाग विधायक भरत चौधरी, पूर्व पालिकाध्यक्ष मुकेश नेगी, कमलकांत कांडपाल, सभासद अनिल नेगी आदि ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। बड़े भाई राहुल ने चिता को मुखाग्नि दी। साथ ही 11 मराठा लाइट इन्फैंट्री रुद्रप्रयाग के नायब सूबेदार नितिन तथा 32 इन्फैंट्री के नायब सूबेदार राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में जवानों ने उन्हें 17 तोपों की सलामी देकर अंतिम विदाई दी। इस मौके पर राम प्रसाद देवली, महादेव बहुगुणा, जयकृत बिष्ट, संजय देवली, राकेश शैली, धनंजय सेमवाल, अजय किशोर भंडारी आदि मौजूद थे।
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वक्त का संयोग ऐसा कि मयंक को जिस दिन छुट्टी लेकर घर आना था, उसी दिन तिरंगे में लिपटा उसका पार्थिव शरीर घर पहुंचा। परिजनों नें बताया कि छुट्टी बची होने से वह मंगल-बुधवार तक घर आने की तैयारी में था। उसकी छुट्टी भी मंजूर हो चुकी थी।
एक साल पहले ही हुई थी शादी
मयंक की पिछले साल 20 नवंबर को शादी हुई थी। मयंक के पिता विजय प्रसाद देवली भी सेना में सेवारत थे और सेवानिवृत्ति के बाद भी वह सेना के अफसर की गाड़ी चलाते रहे। मयंक के ताऊ राम प्रसाद देवली ने बताया कि जम्मू श्रीनगर में वर्ष 2000 में सेना की जिप्सी पर आतंकियों के आरडीएक्स ब्लास्ट के दौरान दो सैन्य अफसरों के साथ उनकी मौत हुई। तब मयंक महज चार साल के थे, जब उनके सर से पिता का साया उठ गया था।