रुक नहीं रही वनाग्नि की घटनाएं, आए दिन जल रहे जंगल
संवाद न्यूज एजेंसी
जोशीमठ। चमोली जनपद के जंगलों में वनाग्नि की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। जोशीमठ में नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत रैणी गांव के जंगल में लगी आग को वन विभाग ने बुझा दिया है लेकिन अब बदरीनाथ हाईवे पर जोगीधारा के पास जंगल में आग लग गई है। वहीं, पीपलकोटी के समीप चीड़ के जंगल में भी आग लगने से कई हेक्टेयर वन संपदा नष्ट हो गई है। जबकि दयूरीकनाल के जंगल भी जल रहे हैं। वन विभाग का कहना है कि लोग खरपतवार जलाने के लिए आग लगा रहे हैं जिससे नुकसान हो रहा है।
चिपको आंदोलन की सूत्रधार गौरा देवी के रैणी गांव में वन पंचायत के जंगल में बृहस्पतिवार शाम को अचानक आग लग गई थी जिसे वन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद शनिवार दोपहर को बुझा दिया। वन कर्मी आग बुझाने के बाद लौट ही रहे थे कि जोगीधारा के जंगल में आग की सूचना आ गई। यहां चीड़ का जंगल है जिससे आग तेजी से फैल रही है। आग लगने से पूरे जोशीमठ क्षेत्र में धुआं छा गया है। सूचना पर वन कर्मी मौके पर पहुंचे और आग बुझाने में जुट गए। वहीं नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के वन क्षेत्राधिकारी गौरव नेगी ने बताया कि जल्द आग बुझा ली जाएगी। जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इधर, पीपलकोटी के ऊपर बदरीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत दयूरीकनाल के जंगल में शनिवार दोपहर करीब एक बजे आग भड़ उठी। चीड़ का जंगल होने से यहां आग तेजी से फैल रही है।
पौड़ी : आधा हेक्टेयर सिविल जंगल जला
पौड़ी। जामणाखाल के बाद अब घोड़ीखाल कस्बे के समीप के सिविल जंगल आग से जल रहे हैं। वन विभाग के मुताबिक अभी तक आधा हेक्टेयर सिविल जंगल आग से जल चुका है।
कंडोलिया स्थित सिविल एवं सोयम वन प्रभाग के समीप पौड़ी-कोटद्वार हाईवे पर घोड़ीखाल कस्बे के समीप के सिविल जंगल आग से जल रहे हैं। ग्रामीण शैलेंद्र सिंह ने बताया कि यहां शुक्रवार से आग लगी हुई है। शुक्रवार को पौड़ी-श्रीनगर हाईवे पर जामणाखाल के समीप के जंगलों में आग लगी थी जो देर रात अपने आप बुझ गई। वहीं सिविल वन प्रभाग के रेंज अधिकारी मनोज रावत ने बताया कि आग बुझाने के लिए जगह-जगह टीमें भेजी जा रही हैं। हालांकि अभी फायर सीजन शुरू नहीं हुआ लेकिन जंगलों का धधकना शुरू हो गया है जो कि चिंता की बात है। संवाद
केदारघाटी और मद्महेश्वर घाटी के जंगल कई दिनों से सुलग रहे
गुप्तकाशी। केदारघाटी और मद्महेश्वर घाटी के साथ ही कालीमठ क्षेत्र के जंगल कई दिनों से आग में जल रहे हैं। जंगलों में लगी आग से जहां लाखों की वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है। टिंगरी क्षेत्र के साथ ही फाटा सहित अन्य क्षेत्र के जंगलों में आग लगी हुई है। जिला पंचायत सदस्य गणेश तिवारी, विनोद राणा, ग्राम प्रधान प्रेम सिंह नेगी, मदन अग्रवाल का कहना है कि सर्दियों में वन जीवों की तस्करी करने वाले अराजक तत्व भी जंगलों में आग लगाते हैं। उन्होंने वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में गश्त की मांग की है। दूसरी तरफ सामाजिक कार्यकर्ता व केदारघाटी के रमेश उत्तराखंडी का कहना है कि कुछ लोग इस सोच के साथ आग लगाते हैं कि बरसात में अच्छी घास उगेगी। दूसरी तरफ केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के ऊखीमठ रेंज के रेंजर प्रदीप गौड़ ने बताया कि जिन-जिन वन क्षेत्रों में आग लगी है, वहां के बारे में कर्मियों से पूरी जानकारी मांगी गई है। संवाद
धुएं से आंखों में जलन, सांस लेने में हो रही दिक्कत
गुप्तकाशी। जंगल की आग के कारण पिछले पांच-छह दिनों से यहां धुएं का गुबार उठ रहा है जिससे चारों तरफ धुंध छाई है। ऐसे में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें होने लगी हैं।धुंध के कारण गांव, कस्बों में दृश्यता भी कम हो गई है। बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, गले में खराश और खांसी हो रही है। एलोपैथिक अस्पताल गुप्तकाशी में इन दिनों पहुंच रहे मरीजों में 60 फीसदी आंंखों में जलन व सांस लेने में हो रही परेशानी के हैं। चिकित्साधिकारी डाॅ. आकाश उनियाल ने बताया कि पांच-छह दिनों से वातावरण में धुंध छाइै है। धुएं के कण सांस लेते समय गले में चले जाते हैं जिससे सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं। संवाद