जरूरतमंदों को सस्ती कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल परिसर में वर्ष 2018 में जन औषधि केंद्र की स्थापना की गई लेकिन उचित प्रबंधन न होने से पिछले तीन साल से केंद्र पर ताला लटका हुआ है। शुरुआत के एक साल तक जिला अस्पताल प्रबंधन ने केंद्र का संचालन खुद किया। बाद में इसका संचालन एक मेडिकल स्टोर चलाने वाले फार्मासिस्ट को दिया गया लेकिन वर्ष 2020 से केंद्र बंद पड़ा है। ऐसे में मरीज मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता सत्येंद्र सिंह रावत और पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य देवेंद्र सिंह का कहना है कि गरीब जनता की सुविधाओं के लिए जनऔषधि केंद्र का खुलना बेहद जरूरी है। डॉक्टर अधिकांश दवाइयां बाहर से मंगवा रहे हैं, जिससे गरीब जनता को मजबूरी में महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। उन्होंने जिला अस्पताल के समीप शीघ्र जन औषधि केंद्र का संचालन शुरू कराने की मांग उठाई। इधर, डिप्टी सीएमओ डॉ. एमएस खाती ने बताया कि जन औषधि केंद्र का संचालन कर रहे व्यक्ति को कई बार केंद्र खोलने के लिए लिखा गया लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा है। अब रेडक्रॉस के भवन पर जन औषधि केंद्र का संचालन किया जाएगा। रेडक्रॉस सोसायटी की स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक भी हुई है। जल्द इसे शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
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यह हैं जन औषधि केंद्र के फायदे
- वर्ष 2017 में केंद्र सरकार की ओर से प्रत्येक जिला अस्पताल व उपजिला अस्पताल के समीप जन औषधि केंद्र खाेलने की योजना बनाई गई। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को केंद्र से सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराई जानी हैं। ये केंद्र छोटे मेडिकल स्टोर जैसे होते हैं जिन पर जेनेरिक दवाइयां सस्ते मूल्य पर मिलती हैं। ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में जन औषधि केंद्रों पर 50 से 90 फीसदी तक कम कीमत पर दवाइयां मिलती हैं।