चौपता चौंरी में त्रिसाला नवरात्र के अवसर पर पूजा अर्चना करते श्रद्वालु।
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चौपता गांव के गिरिजा भवानी मंदिर में नवरात्र मेला शुरू हो गया है। मंदिर के मुख्य पुजारियों, देवी-देवताओं के पश्वाओं, मायके आई ध्याणियों, हक-हकूकधारियों और ग्रामीणों ने जल कलश यात्रा का स्वागत किया और मंदिर में मंत्रोच्चारण कर देवी-देवताओं का आह्वान किया। इस नवरात्र मेले को लोग चौपता कौथिक के नाम से पुकारते हैं।
पूर्व कनिष्ठ उपप्रमुख दलवीर सिंह ने बताया कि इस चौपता कौथिक की परंपरा है कि यह मेला हर तीन सालों में होता है। मंदिर के मुख्य पुजारी भास्करानंद सती ने बताया कि मंदिर परिसर में गुरु गोरखनाथ की अखंड धूनी है। इस अखंड धूनी की भस्म के महत्व को बताते हुए उन्होंने बताया कि आदिकाल में यहां से पंडित नारायण दत्त बदरीनाथ की यात्रा पर जा रहे थे तो उस समय इस पूरे क्षेत्र में हैजा फैला हुआ था। तब उन्होंने इस धूनी की भस्म जिसको भी लगाई वह हैजा से सुरक्षित रहा। इसीलिए आज भी श्रद्धालुओं के लिए इस धूनी की भस्म किसी अमृत से कम नहीं है। मंदिर समिति के अध्यक्ष अवतार सिंह सिनवाल ने श्रद्धालुओं से कोविड गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए मां गिरिजा भवानी राजराजेश्वरी के दरबार में पहुंचने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुख्य पुजारी वरुण सती, ग्राम प्रधान पृथ्वी नेगी, मोहन सिंह रावत, कोषाध्यक्ष रणजीत सिंह और सरोप सिंह सिनवाल आदि उपस्थित थे।