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Chamoli News: वेदनी बुग्याल पहुंची मां नंदा की डोली

Tue, 10 Sep 2024 06:07 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
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देवाल के वेदनी कुंड की परिक्रमा करती नंदा की डोली और लोक जात यात्रा, साथ ही वेदनी कुंड के समीप
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देवाल। श्री राजराजेश्वरी नंदा लोकजात यात्रा व मां नंदा की डोली वाण के लाटू देवता की अगुवानी में वेदनी बुग्याल पहुंची। यहां सप्तमी की जात कर डोली व यात्रा वांक गांव के लिए लौट गई। श्रद्धालु ब्रह्मकमल को प्रसाद के रूप में अपने घर ले गए। अब 17 सितंबर को डोली सिद्धपीठ देवराड़ा मंदिर पहुंचेगी और छह माह तक यहीं विराजमान रहेगी।
बीते माह 23 अगस्त को सिद्धपीठ कुरुड़ से चली मां नंदा की डोली व यात्रा नंदानगर, थराली व देवाल ब्लॉक के विभिन्न पड़ावों से होते सोमवार को निर्जन पड़ाव गैरोली पहुंची थी। मंगलवार की सुबह गैरोली में पूजा करने के बाद नंदा की डोली गांवों की देव छंतोलियां तीन किमी की खड़ी चढ़ाई की दूरी तय करने के बाद साढ़े आठ बजे वेदनी पहुंची। कुरुड़ से पहुंचे गौड़ ब्राह्मणों ने झोड़ा व देव स्तुति की। श्रद्धालुओं ने कुंड में स्नान कर पितरों का श्राद्ध किया। वहीं कुंड परिसर में स्थित महेश मर्दिनी मंदिर में पंडित उमेश कुनियाल व रमेश कुनियाल ने पूजा की। वाण के लाेगों ने यहां त्रिशूल स्थापित किया। दोपहर को डोली आली बुग्याल होते वांक गांव लौट गई। डोली की अगुवानी वाण गांव से आगे लाटू देवता ने की। डोली 11 सितंबर को ल्वाणी, 12 को उलंग्रा, 13 को बेराधार, 14 को गोठींडा, 15 को कुराड़, 16 को डांली, 17 सितंबर को सिद्धपीठ देवराड़ा में पहुंचेगी। इसके बाद छह माह तक यहीं विराजमान हो जाएगी।
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छोड़ीगे नंदा मैत्यों मुलुक, पहुंची शिव कैलाश...

बालपाटा और नरेला बुग्याल से मां नंदा की डोली कैलाश के लिए हुई विदा, भक्तों ने दी अश्रुपूर्ण विदाई

संवाद न्यूज एजेंसी
नंदानगर/पीपलकोटी। विभिन्न पड़ावों से होते हुए मां नंदा की डोली मंगलवार को कैलाश के लिए विदा हो गई है। नंदा सप्तमी पर्व पर दशोली की मां नंदा बालपाटा और बंड क्षेत्र की मां नंदा नरेला बुग्याल से कैलाश के लिए रवाना हुईं। इस दौरान हिमालय क्षेत्र में मां नंदा की विशेष पूजाएं हुईं। अपनी आराध्य देवी मां नंदा को ससुराल विदा करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त नरेला और बालपाटा पहुंचे थे। महिलाओं ने छोड़ीगे नंदा मैत्यों मुलुक, पहुंची शिव कैलाश.. समेत कई मांगल गीत गाए और अश्रुपूर्ण विदाई दी।
बीते 23 अगस्त को सिद्धपीठ कुरुड़ से मां नंदा की डोली ने कैलाश के लिए प्रस्थान किया। सोमवार को नंदा की लोकजात यात्रा अपने अंतिम पड़ाव रामणी गांव पहुंची। मंगलवार को मां नंदा की विशेष पूजाएं हुईं। भक्तों ने मां नंदा को स्थानीय उत्पादों का भोग लगाया और ध्याणियों (विवाहित बेटियां) ने शृंगार सामग्री भेंट की। सुबह छह बजे मां नंदा की डोली ने भक्तों के साथ बालपाटा के लिए प्रस्थान किया। महिलाओं ने जागर और मांगल गीत गाकर मां नंदा को विदाई दी। दोपहर साढ़े बारह बजे माता की डोली बालपाटा पहुंची। यहां पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा को प्रतीक के रूप में कैलाश के लिए विदा किया गया। अपराह्न तीन बजे यात्रा लौटी और रात्रि प्रवास के लिए रामणी गांव पहुंची।
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इंसेट

बामणी गांव में नंदा लोकोत्सव शुरू
बदरीनाथ। बामणी गांव में मंगलवार से तीन दिवसीय नंदा लोकोत्सव शुरू हो गया है। इस दौरान नंदा मंदिर और बदरीनाथ धाम में पूजा के बाद फुलारी (ब्रह्मकमल लाने वाले) मां नंदा को ससुराल से लाने के लिए रवाना हो गए हैं। नीलकंठ पर्वत की तलहटी से मां नंदा को ब्रह्मकमल के रूप में बामणी गांव लाया जाएगा। बामणी गांव को मां नंदा का मायका माना जाता है। नंदा अष्टमी बुधवार को बदरीनाथ धाम के गर्भगृह में बदरीश पंचायत में विराजमान कुबेर भगवान की उत्सव डोली भी नंदा लोकोत्सव में पहुंचेगी। संवाद
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