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आस्था के सामने सब नत्मस्तक

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इरादे बड़े हों तो उम्र राह में बाधा नहीं बन सकती, चाहे सामने पहाड़ ही क्यों ना खड़ा हो। इस बात को साबित किया है पश्चिम बंगाल के हावड़ा में यूकेजी में पढ़ने वाले पांच साल के शौर्य मन्ना ने। रुद्रनाथ मंदिर तक 19 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई शौर्य हंसते-हंसते चढ़ गया। इसके बाद वह पंचगंगा, हंस बुग्याल और अनसूया माता मंदिर की ट्रेकिंग करते हुए लौटा। शौर्य के चेहरे पर थकान के बजाय प्यारी सी मुस्कान उसके बुलंद हौसले की गवाही दे रही थी।
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शौर्य के पिता सरोज मन्ना और माता संजुक्ता मन्ना पांच साल पहले पंच केदार के दर्शन के लिए उत्तराखंड पहुंचे थे। हालांकि, वे चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के दर्शन नहीं कर पाए थे। तब शौर्य का जन्म नहीं हुआ था। पांच साल बाद वे शौर्य को भी अपने साथ रुद्रनाथ मंदिर के दर्शनों के लिए लेकर आए। छह जून को उन्होंने सगर गांव से रुद्रनाथ मंदिर के लिए यात्रा शुरू की। शौर्य के लिए घोड़े की व्यवस्था की गई, लेकिन उसने भी पैदल चलने की जिद्द पकड़ ली।
इसे देखते हुए पिता ने सगर गांव से एक स्थानीय युवक को गाइड के रूप में साथ लिया। पहले दिन वे 12 किमी की दूरी पर स्थित पनार बुग्याल में रात्रि प्रवास के लिए पहुंचे। सात जून को सुबह पांच बजे चलकर दोपहर 12 बजे वे रुद्रनाथ मंदिर पहुंचे। 19 किमी की पैदल दूरी तय करने के बाद भी शौर्य के चेहरे पर थकान नहीं दिखी।
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सरोज मन्ना ने बताया कि शौर्य ने पहली बार इतनी लंबी दूरी की ट्रेकिंग की है। बताया कि वे बीच-बीच में वे कुछ देकर थकान मिटाने के बाद आगे बढ़ते रहे। शौर्य की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। आठ जून को वे पंचगंगा, हंस बुग्याल और अनसूया माता मंदिर से होते हुए मंडल में सड़क मार्ग तक पहुंचे। बताया कि वे कोलकाता में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं और उनकी पत्नी शिक्षिका हैं।
रुद्रनाथ पहुंचते हैं सर्वाधिक बंगाली तीर्थयात्री
रुद्रनाथ मंदिर समुद्र तल से 2286 मीटर की ऊंचाई पर खूबसूरत बुग्यालों के बीच स्थित है। यहां शिव के मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। यहां सर्वाधिक तीर्थयात्री पश्चिम बंगाल से पहुंचते हैं। बताया जाता है कि वर्षों पूर्व बंगाल से आए एक तीर्थयात्री ने रुद्रनाथ सहित पंचकेदारों पर पुस्तक का प्रकाशन किया था। इसे पढ़ने के बाद पश्चिम बंगाल के तीर्थयात्री पंचकेदारों के दर्शनों को प्रतिवर्ष आते हैं। इस वर्ष 19 मई से अभी तक 65 बंगाली तीर्थयात्री रुद्रनाथ मंदिर पहुंच चुके हैं। कहीं खड़ी चढ़ाई तो कहीं मखमली बुग्यालों के मध्य से रुद्रनाथ मंदिर के लिए आस्था पथ गुजरता है। पूरे मार्ग से बर्फ से लकदक हिमालय की चोटियों के दर्शन होते हैं।
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