गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि पूर्व डिप्टी स्पीकर डॉ. अनसूया प्रसाद मैखुरी विराट व्यक्तित्व के धनी थे। मेरी आंखें आज भी उनको ढूंढती हैं। उनकी काबलियत, सृजनशीलता, मेहनत और ईमानदारी हमेशा इस दुनियां में जिंदा रहेगी। उन्होंने कहा कि हमारी नई पीढ़ी को पुरातन परंपराओं को संजोकर रखना होगा।
पूर्व डिप्टी स्पीकर डॉ. अनसूया प्रसाद मैखुरी की पुण्यतिथि पर रविवार को हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेश जिलासू की ओर से श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान डॉ. मैखुरी के चित्र का अनावरण और उनके संस्मरणों पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। मुख्य अतिथि पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि हमें अपनी पुरानी परंपराओं के संरक्षण पर जोर देना होगा। हम सबको पर्यावरण के प्रति जागरूक होना होगा। अगर हम जागरूक नहीं हुए तो गर्मियों में उफान पर दिखने वाली नदियां सारी बर्फ पिघलने के बाद नाले के रूप में भी नहीं बचेंगी। इस मौके पर एसजीआरआर के कुलपति डॉ. यूएस रावत, गढ़वाल विवि के कुलसचिव डॉ. अजय खंडूड़ी, डीएस बर्तवाल, स्व. अनसुया प्रसाद की पत्नी सावित्री मैखुरी, डॉ. भगवती पुरोहित, डॉ. एसपी डिमरी, बीरेंद्र रावत, इंद्रेश मैखुरी, हरिकृष्ण भट्ट, रैजा चौधरी, लक्ष्मण बिष्ट, राकेश डिमरी, भुवन नौटियाल और मंगला कोठियाल आदि मौजूद थे।