चोपता चौंरी मेले में मां गिरजा भवानी राजराजेश्वरी माता से आशीर्वाद लेते श्रद्धालु।
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चोपता चौंरी मेला सोमवार को यज्ञ-हवन, प्रसाद वितरण व ब्रह्मभोज के साथ संपन्न हो गया। पांच दिसंबर से शुरू हुए नवरात्र मेले में हजारों लोगों ने देवी की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में आदि गुरु शंकराचार्य काल से ही गुरु गोरखनाथ की अखंड धूनी विद्यमान है। इसकी भभूत श्रद्धालु प्रसाद स्वरूप घर ले गए। नित्य आरती पूजन के उपरांत सबसे पहले बुढेरा नृत्य का मंचन किया गया। जीतू बगड्वाल के अनुयायियों के लिए यह मंचन भावविभोर करने वाला होता है।
सोमवार सुबह सिद्धपीठ मंदिर में पूजन के साथ ही नवरात्र शांति के लिए यज्ञ-हवन का आयोजन किया गया। इसमें नौ गांवों के लोगों के साथ ही तमाम श्रद्धालुओं ने भी आहुति दी। इसके बाद विधि विधान और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां गिरजा भवानी राजराजेश्वरी की मूर्ति, भूमियाल देवता और वीर-भैरव के निशानों को उनके मुख्य पुजारियों और पश्वाओं के घरों में विराजमान कर दिया गया। उसके बाद नौ कन्याओं को भोजन कराने के साथ ही प्रसाद वितरण और ब्रह्मभोज का आयोजन किया गया। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह सिनवाल एवं कड़ाकोट पट्टी के समस्त नौ गांवों के लोगों ने शासन-प्रशासन सभी श्रद्धालुओं व मेलार्थियों का शांतिपूर्ण ढंग से चौपता चौंरी कौथीक में सहयोग करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है। इस अवसर पर दलवीर सिंह, सरोप सिंह, जगदीश प्रसाद, दिगपाल रावत, बलवीर सिंह, मनमोहन सिंह, सुरजीत सिंह, जगमोहन, अरुण सती, दिगपाल राम, संदीप सती, मोहन सिंह, पृथ्वी नेगी, मुकेश सागर, रमेश लाल, अन्नू नेगी, गजपाल सिंह थे। संवाद