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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के मामले में आई फैसले की घड़ी

Tue, 05 Apr 2016 08:22 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
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हरीश रावत - फोटो : ANI
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नैनीताल हाईकोर्ट में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार के अपना जवाब दाखिल करने के बाद मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से प्रतिशपथ पत्र दाखिल कर दिया गया है।
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साथ ही विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने भी अपना जवाब दाखिल कर दिया गया है। मामले में सुनवाई बुधवार 6 अप्रैल को होगी। बता दें कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के खिलाफ निवर्तमान सीएम हरीश रावत की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने विधानसभा में शक्ति परीक्षण के लिए 31 मार्च की तिथि तय की थी।

कोर्ट ने शक्ति परीक्षण में बागी विधायक को भी शामिल करने के निर्देश दिए थे। एकलपीठ के इस आदेश को हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार ने चुनौती दी थी। इस प्रकरण पर सोमवार को गृह मंत्रालय भारत सरकार के निदेशक सतेंद्र कुमार भल्ला ने जवाब दाखिल कर कहा था कि राष्ट्रपति शासन लगाने के संदर्भ में सील कवर में सभी दस्तावेज जमा कर दिए गए हैं क्योंकि यह दस्तावेज गोपनीय है जिन्हें संलग्न नहीं किया है।
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ये था पूरा मामला

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत - फोटो : amar ujala
मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने भी प्रतिशपथ पत्र दाखिल कर कहा है कि विनियोग विधेयक 18 मार्च को विधानसभा में पास हो गया था इसके बाद भाजपा विधायक राज्यपाल से नौ बागी विधायकों के साथ मिले।

इस आधार पर राज्यपाल ने सरकार से 28 मार्च को सदन में बहुमत साबित करने को कहा था लेकिन इससे पहले 27 मार्च को सरकार बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।

इसके अलावा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल की ओर से अपना जवाब दाखिल कर कहा गया कि विधायकों की सभी मांगे विधानसभा में ध्वनिमत से पारित की गई थीं। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने अलग अलग विभागों की मांगों को सदन के आगे रखा जिसे ध्वनिमत से पारित किया गया।

कहा कि उन्होंने नियम और कानून के तहत सदन से पारित विधेयक को हस्ताक्षर कर संसदीय कार्य मंत्रालय के माध्यम से 19 मार्च को राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा था। स्पीकर ने कहा कि उन्हें संविधान के आर्टिकल 212 के अंतर्गत सदन चलाने की पूर्ण आजादी है।
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