केंद्र सरकार की ओर से आम बजट में एक्साइज ड्यूटी लगाने के विरोध में सर्राफा बाजार दसवें दिन भी बंद रहा। कारोबारियों ने पहले सांसद रमेश पोखरियाल निशंक का घेराव कर ज्ञापन दिया और इसके बाद सांकेतिक रूप से लिंक एक्सप्रेस रोकी। इस बीच कारोबारियों का क्रमिक अनशन जारी रहा।
एक्साइज ड्यूटी के विरोध में आंदोलन कर रहे सर्राफाकारोबारी शुक्रवार को उग्र हो गए। पहले वह सुबह 9:30 बजे हरिद्वार सांसद डा. रमेश पोखरियाल निशंक के आवास पहुंचे। यहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए उन्हें ज्ञापन सौंपा।
इसके बाद धरनास्थल पर पहुंचकर अर्जुन नारायण, गुरमीत सिंह सेठी, भूपेंद्र सिंह धीर, अब्दुल खालिक, शेख मोईनुद्दीन क्रमिक अनशन पर बैठे। यहां से विशाल रैली के रूप में सर्राफाकारोबारी रेलवे स्टेशन पहुंचे।
यहां केंद्र सरकार और वित्त मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। दोपहर के वक्त दून से जाने वाली लिंक एक्सप्रेस को सांकेतिक रूप से रोका। सर्राफामंडल के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा की हम दस दिनों से आंदोलन कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार नींद में है।
हमारे सांसद हमारी ही आवाज नहीं उठाते:
हमारे पांचों सांसद जो संसद में बैठे हैं, हमने उन्हें इसलिए नहीं चुना था कि वह हमारी आवाज ही न उठाएं। उन्होंने मांग की कि सभी सांसद उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाएं।
उपाध्यक्ष सुनील मैसोन ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी के साथ ही दो लाख रुपये की खरीदारी पर पैन कार्ड की अनिवार्यता अव्यवहारिक है। हमारे पास जो ग्राहक आएगा अगर उसकी इनकम टैक्स डिटेल मांगेंगे तो वह माल ही नहीं खरीदेगा। हमारा व्यापार बर्बाद हो जाएगा।
सर्राफामंडल के सचिव मनमीत सिंह ने बताया कि अपना परिवार संगठन ने उन्हें समर्थन दे दिया है। संयुक्त सचिव गौरव रस्तोगी ने बताया कि युवा सर्राफामंडल के सभी सदस्यों ने आंदोलन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इस मौके पर अमित गोयल, सुमित गोयल, सत्यम रस्तोगी, प्रीतपाल सिंह, दीपक मराठा, हिमांशु, मासूम, सचिन, देवेंद्र मौजूद रहे।
इन्होंने भी दिया समर्थन:
सर्राफाकारोबारियों के आंदोलन को मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी, सीटू, जनवादी महिला समिति, जिला किसान सभा, भारत की जनवादी नौजवान सभा, एसएफआई सहित कई संगठनों ने समर्थन दे दिया है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक हरबंस कपूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर एक्साइज ड्यूटी खत्म करने की मांग की।