फ्लोर टेस्ट में हरीश रावत सरकार को बसपा के समर्थन देने के मामले में सोमवार देर रात तक मंत्रणा चली। रणनीतिकारों की मानें तो बसपा ने कांग्रेस को समर्थन देने का निर्णय ले लिया है। बसपा के उत्तराखंड प्रभारी नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने दून पहुंच कर बसपा विधायकों और प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। माना जा रहा है कि यह फैसला यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लिया गया है।
फ्लोर टेस्ट के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद बसपा विधायकों ने नकारात्मक रुख अपना लिया था। विधायक हरिदास रावत सरकार पर अनदेखी का आरोप लगा रहे थे। बसपा कोटे के मंत्री सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद रावत सरकार ने किसी को मंत्री नहीं बनाया था। इसके अलावा बसपा सुप्रीमो मायवती का कोई स्पष्ट निर्देश भी विधायकों को नहीं मिला था। बाद में स्थिति का जायजा लेने के लिए उत्तराखंड प्रभारी सिद्दीकी को दून भेजा गया।
बंद कमरे में चली बैठक
सोमवार को सिद्दीकी ने विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बंद कमरा बैठक की। इससे बसपा सुप्रीमो को अवगत कराया दिया गया। राजनीतिक रणनीतिकारों का कहना है कि कोई विकल्प न होने के कारण बसपा ने कांग्रेस के समर्थन का मन बनाया है।
इसके साथ ही इसमें यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति भी शामिल है। जरूरत पड़ने पर सरकार बनाने के लिए बसपा यूपी में कांग्रेस का समर्थन मांग सकती है। बसपा के समर्थन के निर्णय से हरीश रावत सरकार को फ्लोर पर बहुमत साबित करने में और आसानी हो जाएगी।