हर विधायक को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।
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फ्लोर टेस्ट से विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उपलब्ध कराई गई सुरक्षा से किनारा कर लिया है। अधिकतर विधायक अपने अंगरक्षकों (गनरों)को बीच सड़क पर छोड़कर अपने-अपने खेमों में चले गए। ऐसे में अंगरक्षकों को कार्रवाई से बचाने के लिए पुलिस ने लिखापढ़ी कर ली है।
किस विधायक ने गनर को कहां छोड़ा, सुरक्षा देने के लिए क्या प्रयास हुए, यह सब पुलिस रोजनामचे में दर्ज किया गया है। क ई गनर तो बचाव में जनप्रतिनिधियों से बातचीत की रिकार्डिंग करके लाए हैं। अफसरों को एक ही चिंता सता रही है कि यदि किसी विधायक के साथ कुछ भी अप्रिय हुआ तो जवाब देते नहीं बनेगा।
सियासी घमासान के बीच विधायकों को दो गनर उपलब्ध कराए गए थे। दस मई को फ्लोर टेस्ट का समय निर्धारित होने के बाद से पुलिस और खुफिया तंत्र लगातार विधायकों से सुरक्षा बढ़ाने के लिए संपर्क कर रहा था। भाजपा और कांग्रेस विधायकों के अपने खेमे में जाने के कारण अधिकांश विधायक अपने गनर को सड़क पर छोड़कर चले गए।
15 विधायकों ने वापस की सुरक्षा
इन विधायकों ने फिलहाल किसी तरह की सुरक्षा से इनकार कर दिया। पहले योजना गनर को भाजपा और कांग्रेस विधायकों के ठिकानों पर भेजने की थी, लेकिन उसे नकार दिया गया। दरअसल गोपनीयता भंग होने के डर से गनर को साथ लेने का रिस्क नहीं ले रहे हैं। सूत्रों की मानें तो दून जिले में करीब 15 विधायकों द्वारा सुरक्षा वापस किए जाने का तस्करा जीडी में डाला गया है।
विधानसभा के बाहर रहेंगे गनर
विधायकों के तमाम गनरों को मंगलवार सुबह विधानसभा के बाहर तलब किया गया है। विधानसभा से बाहर निकलने के बाद एक बार फिर गनर साथ चलने के लिए अपने-अपने विधायकों से अनुरोध करेंगे। यदि विधायक सुरक्षा नहीं लेते है तो फिर से उसकी लिखापढ़ी कर ली जाएगी।