हरिद्वार के लालजीवाला में गंगातट पर साधु अरुणनाथ तपस्यारत हैं। पूरी काया जमीन के भीतर है, सिर्फ गर्दन के ऊपरी हिस्सा ही बाहर है। 85 वर्ष के बाबा अरुण नाथ ने बताया कि वह 2002 से लगातार हर वर्ष ऐसी समाधि लगाते आ रहे हैं।
बाबा पूरे नौ दिन सिर्फ इसी नवरात्रों में बिना कुछ खाए समाधि में लीन रहते हैं। मां काली के अनन्य भक्त हैं। उन्होंने अपना डेरा लालजीवाला में ही पीपल के नीचे लगाया है।
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नवरात्रों के दिनों में भूसमाधि
उन्होंने बताया कि अगर वह शहर से बाहर जाते हैं तो भी नवरात्रों के दिनों में वह जिस भी शहर या गांव में रहें भूसमाधि अवश्य ही लगाते हैं। उन्होंने बताया कि संसार में लूटपाट, भ्रष्टाचार, मारपीट, धोखाधड़ी का बोलबाला है।
देश इन सबसे बचाने के लिए ऐसे कार्य लाभकारी होते हैं। उन्होंने बताया कि मिट्टी से शरीर भी शुद्ध होता है। नौंवे दिन भू समाधि से बाहर आने पर वह प्रसाद भी बांटेंगे।