उत्तराखंड में कुदरत ने जो तबाही मचाई है, उसके सबूत अब मैदानी इलाकों तक पहुंचने लगे हैं।
जो लोग पहाड़ी इलाकों में मारे गए हैं, नदियों के जरिए उनके शव अब मैदानी इलाकों में बहते हुए पहुंच रहे हैं।
हरिद्वार में गंगा नदी में ऐसे ही शव बहते हुए पहुंचे हैं। वहां के एसएसपी एसएसवी राजीव स्वरूप ने बताया, 'गंगा नदी से 17 शव निकाले गए हैं।'
कुदरत के कहर के बाद बचाव की कोशिश
जो शव बहते हुए मिले हैं, उनकी शिनाख्त करना मुमकिन नहीं है। इस बीच यह आशंका जताई जा रही है यह शव ऊपरी इलाकों से बहकर आए हैं।
1,100 सड़कें गायब, 94 पुल भी बहे
केदारघाटी में 6 हजार, बद्रीनाथ में 10 हजार फंसे
इस बीच देहरादून से खबर है कि सेना और आईटीबीपी के दस हजार से ज्यादा जवान राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। लगभग 25 हेलीकॉप्टर लोगों को निकालने में जुटे। सड़क के रास्ते से भी निकाले जा रहे हैं लोग।
तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
माना जा रहा है कि केदारघाटी में अब भी लगभग छह हजार लोग फंसे हैं। , इनमें से अधिकांश को तुरंत बचाए जाने की जरूरत हैं। बदरीनाथ में दस हजार लोग फंसे बताए जा रहे हैं। वहां राशन तक खत्म हो गया है।
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शनिवार से मौसम विभाग ने बारिश की भी आशंका जताई है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को शुक्रवार को ही निकालने की कोशिश होगी। फिलहाल मौसम ठीक है।