राज्यसभा में भाजपा को करना पड़ा सकता है हार का सामना करना पड़ सकता है। इसके कुछ कारण है। यूपी में भी चुनाव अगले वर्ष हैं, इसलिए लोकसभा या राज्यसभा में उत्तराखंड के मुद्दे पर सपा व बसपा का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन मिलने की उम्मीद भी कम ही है।
वरना, राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा था कि यदि केंद्र सरकार कहेगी तो मुलायम सिंह यादव और मायावती उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को सपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन यह तभी संभव था, जब यूपी में चुनाव नजदीक न होते। इसलिए अब इसकी संभावना कम ही रह गई है।
जब से केंद्र में भाजपा सरकार आई और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तभी से सपा और बसपा ने किसी मौके पर बहुत विरोध नहीं किया। इसके अलावा कई मुद्दों पर दोनों दलों ने सदन में अप्रत्यक्ष रूप से सपोर्ट भी किया है।
उत्तराखंड के मुद्दे पर मुश्किल लगता है सपोर्ट
हालांकि राजनीतिज्ञ लोग इसके पीछे मुलायम सिंह और मायावती के खिलाफ सीबीआई जांच गतिमान होने का हवाला देते हैं, लेकिन फिर भी अब उत्तराखंड के मुद्दे पर किसी तरह सपोर्ट मुश्किल लगता है।
इसलिए यदि राष्ट्रपति शासन को दोनों सदनों में पारित कराना पड़ा तो भाजपा को राज्यसभा में हार का सामना करना पड़ सकता है। वैसे भी बसपा तो इसलिए भी नहीं करेगी, क्योंकि वह उत्तराखंड में कांग्रेस को समर्थन कर रही है। यदि ऐसा करेगी तो पहले समर्थन वापस लेना पड़ेगा।