बागेश्वर। वेलेंटाइन डे पर लोकतंत्र का कौथिग जोश और उत्साह से मनाया गया। लोकतंत्र के महापर्व में भागीदारी करने के लिए लोग भारी संख्या में घरों से निकले। जिले की दोनों विधानसभा सीटों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में मतदान को लेकर अधिक उत्साह था। कोई डोली की मदद से वोट डालने पहुंचा तो कोई अपनों का सहारा लेकर लोकतंत्र के त्योहार में शरीक हुआ। स्वयंसेवियों ने भी मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने में अपना योगदान दिया।
विधानसभा चुनाव को लेकर बागेश्वर और कपकोट विधानसभा क्षेत्र में सुबह से ही वोटरों में उत्साह देखने को मिला। जिला मुख्यालय के आदर्श प्राथमिक विद्यालय में बने सखी बूथ से लेकर नर्सरी में बने आदर्श बूथ तक, जिला पंचायत से लेकर राबाइंका, प्राथमिक विद्यालय द्वितीय सहित हर बूथ पर मतदान शुरू होने के बाद से वोट डालने को मतदाताओं की कतार लगनी शुरू हो गई। कपकोट के आदर्श प्राथमिक विद्यालय, ब्लॉक कार्यालय में बने पोलिंग बूथ से लेकर गरुड़ और गागरीगोल के मतदेय स्थलों तक मतदाताओं में काफी उत्साह रहा। कांडा, दुगनाकुरी, काफलीगैर, शामा क्षेत्र के मतदेय स्थलों पर भी कमोबेश ऐसा ही उत्साह देखा गया। ग्रामीण बूथों में भी महिलाओं ने कामकाज निपटाकर मतदान किया। पूरे दिन मतदेय स्थलों में महिलाओं की कतार पुरुषों से लंबी रही। हर बूथ पर महिलाओं ने मतदान में बढ़ चढ़कर भागीदारी की।
डंगोली बूथ पर सात बुजुर्ग सखियों ने एक साथ किया मतदान
बागेश्वर। लोकतंत्र के कौथिग में डंगोली गांव की सात सखियों ने एकसाथ आकर मतदान किया। इन महिलाओं की उम्र 65 से 87 वर्ष के बीच है।
डंगोली गांव की लीता देवी (87), चंपा देवी (71), बसंती देवी (73), चंद्रा देवी (61), बचुली देवी (82), सरस्वती देवी (63) और गोपुली देवी (82) के बीच गहरी मित्रता है। बातचीत में महिलाओं ने बताया कि सभी सहेलियां एक-दूसरे की मदद करती आई हैं। जीवन के हर संघर्ष में वह एक-दूसरे का साथ देती हैं, फिर मतदान करने अकेले कैसे आतीं। महिलाओं को मतदान केंद्र तक आने के लिए करीब आधा किलोमीटर पैदल भी चलना पढ़ा। अधिक उम्र की महिलाओं को उनके परिवारों के युवा पंकज गोस्वामी, जगदीश गोस्वामी, राजेंद्र गोस्वामी और सुंदर लाल वर्मा ने मतदान केंद्र तक पहुंचाया।
चनरा आमा ने तीन किमी पैदल चलकर किया मतदान
बागेश्वर। कपकोट के सीमा गांव की चनरा देवी मतदान करने के लिए तीन किलोमीटर पैदल गईं। उन्होंने गांव से करीब डेढ़ किमी का उतार पार किया। फिर मोटर मार्ग से भी डेढ़ किमी की दूरी तय की। आमा अपनी बहू को लेकर बिना रुके और थके गांव से मतदान केंद्र तक पहुंच गई।
कोई डोली पर तो कोई व्हीलचेयर की मदद से पहुंचा वोट देने
बागेश्वर। विधानसभा चुनाव में मतदान करने के लिए बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं ने भी उत्साह दिखाया। वोट देने के लिए कोई डोली की मदद से आया तो किसी मतदाता ने व्हीलचेयर का सहारा लिया। जीतनगर में लकवाग्रस्त गोदावरी देवी को उनके पुत्र गोविंद पंत व्हीलचेयर पर बैठाकर मतदान केंद्र लाए। हरसीला बूथ में दिव्यांग मतदाता बहादुर सिंह भी व्हीलचेयर पर बैठकर मतदान केंद्र पहुंचे। गरुड़ के मटेना बूथ में 92 वर्ष की कलावती देवी ने डोली की मदद से मतदेय स्थल आकर वोट किया। व्हीलकुलवान के चनर राम और मन्यूड़ा के मोहन सिंह ने रेडक्रॉस स्वयंसेवियों की मदद से मतदान केंद्र तक आकर मताधिकार का प्रयोग किया।
शिक्षक और ग्रामीण ने पितृकर्म के बीच मतदान कर दिया बड़ा संदेश
कपकोट। राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज कपकोट के शिक्षक कुंदन लाल और ग्रामीण त्रिलोक राम ने पितकर्म के बीच मतदान केंद्र आकर मतदान कर बड़ा संदेश दिया। शिक्षक कुंदन लाल के पिता पूर्व प्रधानाचार्य उत्तम राम का सात दिन पहले निधन हुआ है। वहीं कपकोट निवासी त्रिलोक राम के पिता गोपाल राम के निधन को 10 दिन हुए हैं। उन्होंने भी पितकर्म से निवृत्त होने के बाद सोमवार दोपहर कपकोट के आदर्श प्राथमिक विद्यालय में बने बूथ में आकर मतदान किया।
मतदान भी, घर का काम भी
बागेश्वर। पहाड़ों में महिलाओं के हिस्से चूल्हे-चौके के साथ खेतीबाड़ी और पशुपालन की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में महिलाओं ने मतदान के लिए समय निकाला और अपने रोजमर्रा के काम को भी बखूबी किया। जिले के विभिन्न गांवों में महिलाओं ने खेतीबाड़ी और घर के कामकाज से समय निकालकर मतदान किया।
बागेश्वर में शतकवीरों ने भी दिखाया जोश
बागेश्वर/कपकोट। लोकतंत्र के कौथिग में शतकवीरों में खासा जोश नजर आया। ये लोग देश के पहले आम चुनाव (1951-52) से मतदान करते आ रहे हैं। कपकोट के पोलिंग बूथ में 100 वर्षीय पूर्व सैनिक नारायण सिंह कपकोटी ने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्हें कपकोट के रिटर्निंग ऑफीसर पारितोष वर्मा ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
शतकवीर नारायण सिंह कपकोटी का कहना था कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए हर किसी को मतदान करना चाहिए। गरुड़ के कोठों निवासी सौ वर्षीय चंद्रा देवी ने मैगड़ीस्टेट बूथ पर मताधिकार का प्रयोग किया। वह स्वयं बूथ तक पहुंची थीं। देवलखेत (गरुड़) की धर्मा देवी परिजनों की सहायता से बूथ पर पहुंची और मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान अधिकारी-कर्मचारियों के साथ ही हर किसी ने शतकवीर मतदाताओं के जोश और जज्बे की सराहना की।
पहली बार आशा कार्यकर्ताओं की मतदान प्रक्रिया में लगी ड्यूटी
बागेश्वर/कपकोट। पहली बार आशा कार्यकर्ताओं की चुनाव ड्यूटी में सीधी भागीदारी रही। आशा कार्यकर्ता हर बूथ पर तैनात थीं। इन्होंने मतदाताओं की थर्मल स्क्रीनिंग कराने के साथ ही उन्हें मतदान के लिए दस्ताने और मास्क बांटे।
सपा, बसपा, निर्दलीय उम्मीदवारों के अधिकतर बूथों में नहीं थे एजेंट
बागेश्वर/कपकोट। बागेश्वर और कपकोट विधानसभा क्षेत्र में सभी बूथों पर कांग्रेस, भाजपा और आप के अभिकर्ता मौजूद दिखे। दोनों सीटों के अधिकतर बूथों पर सपा, बसपा और निर्दलीय प्रत्याशियों के एजेंट नहीं दिखाई दिए।
उतरौड़ा के सखी बूथ में सुबह 11 बजे बाद छाया सन्नाटा
कपकोट/बागेश्वर। कपकोट के उतरौड़ा प्राथमिक स्कूल में बनाए सखी बूथ में पूर्वाह्न 10.50 बजे सन्नाटा पसरा था। मात्र एक मतदाता बूथ के भीतर मतदान की प्रक्रिया निपटा रहे थे। सुुबह 10.50 बजे पीठासीन अधिकारी सुषमा टम्टा ने बताया कि 367 मतदाता वाले बूथ में 69 वोट पड़ चुके हैं। सखी बूथ वाले राजकीय प्राथमिक विद्यालय बागेश्वर प्रथम में सुबह से ही मतदाताओं की लाइन लगी रही। सखी बूथों में पीठासीन अधिकारी और तीनों मतदान अधिकारी महिलाएं थीं।