यादें:वर्ष 2020 के उत्तरायणी मेले में लगे झूले, आयोजन स्थल पर लगी लोगों की भीड़। फाइल फोटो
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बागेश्वर। उत्तरायणी का मेला रिंगाल, तांबा उत्पादकों और हस्तशिल्पियों के लिए संजीवनी का काम करता है। वर्ष 2021 में कोरोना के चलते मेला नहीं हुआ। मेला न होने से स्थानीय उत्पादकों के साथ ही लोक कलाकारों को झटका लगा। इस बार दो साल बाद उत्तरायणी का मेला होगा।
ताम्रशिल्पी, हस्तशिल्पी सालभर से उत्तरायणी मेले का इंतजार करते हैं। करीब आठ दिन तक चलने वाले मेले से लघु उद्यमियों को काफी उम्मीद रहती है। जिले में खर्कटम्टा में तांबे का कारोबार होता है। कपकोट के दानपुर क्षेत्र को हस्तशिल्प उद्योग के लिए जाना जाता है। दानपुर क्षेत्र में रिंगाल से बनी कृषि उपयोगी सामग्री का निर्माण होता है। वर्ष 2021 में उत्तरायणी का मेला न होने से ताम्र, हस्तशिल्पियों के साथ ही रिंगाल उत्पादकों को काफी निराशा हुई थी। अब मेले से ताम्र, रिंगाल उत्पादकों के साथ ही हस्तशिल्पियों को काफी उम्मीदें हैं।
लोक कलाकारों की आजीविका भी चलाता है मेला
बागेश्वर। उत्तरायणी मेला सांस्कृतिक दलों, लोक गायकों की आजीविका चलाने में मददगार साबित होता है। मेले में राज्य के सांस्कृतिक दलों के साथ ही बाहरी प्रदेशों के सांस्कृतिक दल कार्यक्रमों की प्रस्तुति देते हैं। स्टार नाइट का आयोजन किया जाता है। झोड़ा, भगनौल कला के जानकारों को भी मंच मिलता है। प्रसिद्ध भगनौल विशेषज्ञ धनी राम का कहना है कि उत्तरायणी मेला संस्कृति के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होता है। मेले का भव्य आयोजन होना चाहिए।
मेले को दिया जाएगा भव्य रूप : पालिकाध्यक्ष
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले का आयोजन नगरपालिका करती है। पालिकाध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने बताया कि इस बार उत्तरायणी का मेला कराने का फैसला लिया गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी विनीत कुमार से वार्ता हो गई है। जल्द ही जिला प्रशासन मेले को लेकर बैठक करेगा। उसके बाद नगरपालिका मेले की रूपरेखा तय करने के लिए बैठक करेगी। मेले का आयोजन भव्य तरीके से किया जाएगा।