बागेश्वर। कोरोना काल ने जिले के पर्यटन व्यवसाय पर बुरा असर डाला। गर्मियों के दिनों में देशी और विदेशी ट्रैकरों की आवक से गुलजार रहने वाले पिंडारी और कफनी ग्लेशियर भी सूने रहे। जिसके चलते ट्रैकिंग के माध्यम से आय अर्जित करने वाले क्षेत्रीय युवाओं को भी नुकसान उठाना पड़ा। इस साल कोरोना का असर कम होने के बाद पिंडारी, सुंदरढूंगा और कफनी ग्लेशियर में अच्छी तादाद में ट्रैकरों के पहुंचने की उम्मीद है। क्षेत्रीय पोर्टर, खच्चर मालिक और स्थानीय उत्पादक भी बेहतर कारोबार की आस लगाए हुए हैं।
जिले के विश्व प्रसिद्ध पिंडारी और कफनी और सुंदरढूंगा ग्लेशियर देश और विदेश से आने वाले ट्रैकरों का पसंदीदा टैक रूट है। इसके अलावा धूर, धाकुड़ी, फुरकिया, खाती भी गर्मी के दिनों में घूमने आने वालों के लिए मुफीद स्थान हैं। अप्रैल से जुलाई तक उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अच्छी संख्या में लोग घूमने आते हैं। ट्रैकरों और पर्यटकों की आवक से क्षेत्रीय गाइड, पोर्टर, खच्चर मालिकों का काम-धंधा भी चरम पर रहता है। हालांकि पिछले दो वर्षों से गर्मी के दिनों में कोरोना के केस बढ़ने के बाद ग्लेशियरों की सैर करने वालों की संख्या बेहद कम रही। जिसके कारण पर्यटन की मदद से घर का खर्च चलाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।
रोमांच भरपूर, चुनौतियां भी कम नहीं
बागेश्वर। ग्लेशियरों में आने वालों को रोमांच तो मिलेगा लेकिन वर्ष 2013 की आपदा के जख्म कदम-कदम पर उनकी परीक्षा भी लेंगे। कफनी को जाने वाले रूट में जांतोली से आगे करीब तीन किमी मार्ग क्षतिग्रस्त है। पिंडारी ग्लेशियर के मार्ग में फुर्किया से जीरो प्वाइंट तक सात किमी की दूरी में तीन ग्लेशियरी नालों में भूस्खलन होता रहता है। इसके अलावा भी मार्ग में कई अन्य चुनौतियां ट्रैकरों के सामने चुनौती पैदा करेंगी। संवाद
ट्रैकिंग रूट को बेहतर बनाने का चल रहा कार्य
बागेश्वर। लोनिवि के ईई संजय कुमार पांडेय ने बताया कि पिंडारी, कफनी और सुंदरढूंगा रूट को बेहतर बनाने का कार्य चल रहा है। पिंडर नदी में पक्के स्पान पुल का निर्माण कार्य पूरा होने को है। कफनी और पिंडारी रूट में आपदा से हुई क्षति का अप्रैल के पहले सप्ताह में निरीक्षण कर मरम्मत कराई जाएगी। धाकुड़ी, खाती, द्वाली और फुर्किया में बने लोनिवि के विश्राम गृृह यात्रियों के स्वागत को तैयार कर दिए गए हैं।
पिछले दो वर्ष पिंडारी, कफनी और सुंदरढूंगा की यात्रा प्रभावित हुई थी। ग्लेशियर आने वालों का रिकॉर्ड वन विभाग रखता है। मार्च 2020 में 14 ट्रैकर आने का रिकॉर्ड पर्यटन विभाग को मिला था। जिसके बाद से किसी के आने की सूचना नहीं है। इस बार कोरोना का असर कम होने से अच्छी संख्या में ट्रैकर आने की उम्मीद है। विश्राम गृहों में दुरुस्त किया जा रहा है। 15 अप्रैल से ग्लेशियर की यात्रा शुरू होगी। तब तक सभी इंतजाम पूरे करा लिए जाएंगे।
कीर्ति चंद्र आर्या, जिला पर्यटन अधिकारी, बागेश्वर