बागेश्वर। देश को सात स्वाधीनता सेनानी देने वाले बागेश्वर के वीर सपूतों के गांव चौरा (दोफाड़) में देश की आजादी के एक साल बाद देश के पहले गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के नाम से खुले स्कूल का आज तक सरकारें प्रांतीयकरण नहीं कर पाई। स्कूल को वित्तीय मान्यता भी नहीं मिली। स्कूल को अवैतनिक पीटीए शिक्षक संचालित करते हैं।
चौरा गांव की वीर जनना भूमि का देश की आजादी में अहम योगदान रहा है। इस गांव ने देश को सात स्वाधीनता सेनानी दिए। चौरा गांव के देश की आजादी में योगदान को देखते हुए पटेल के नाम पर सेनानियों के सहयोग से वर्ष 1948 में जूनियर हाईस्कूल खोला गया। 14 मई 1995 में सरकार ने हाईस्कूल की मान्यता दी लेकिन स्कूल का प्रांतीयकरण करने की किसी भी सरकार ने जहमत नहीं उठाई। स्कूल को वित्तीय मान्यता तक नहीं उठाई। न जनप्रतिनिधियों ने ही इस मामले को गंभीरता से लिया। 62 विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए अभिभावकों ने अपने खर्च पर तीन शिक्षकों की व्यवस्था की है। शिक्षा विभाग ने एक शिक्षक तैनात किया है। उन्हीं के पास प्रधानाचार्य का प्रभार है। सेनानियों के गांव के स्कूल की बदहाली पर चौरा की ग्राम प्रधान आशा देवी, विद्यालय के प्रबंधक हरीश धपोला, सामाजिक कार्यकर्ता हरीश कालाकोटी ने रोष प्रकट करते हुए कहा
है कि देश की आजादी में अहम योगदान देने वाले गांव के स्कूल की बदहाली किसी भी दशा में उचित नहीं है। सरकार और जनप्रतिनिधियों को सेनानियों की जन्मभूमि का सम्मान तो करना ही चाहिए।
चौरा के इन सेनानियों ने लिया अंग्रेजों से लोहा
स्वर्गीय मंगल सिंह धपोला पुत्र नर सिंह धपोला, स्वर्गीय कल्याण सिंह धपोला पुत्र गोपाल सिंह धपोला, स्वर्गीय भवान सिंह धपोला पुत्र बिशन सिंह धपोला, स्वर्गीय प्रेम सिंह धपोला पुत्र त्रिलोक सिंह धपोला, स्वर्गीय हयात सिंह पुत्र नारायण सिंह, स्वर्गीय चंद्र सिंह पुत्र विजय सिंह धपोला, स्वर्गीय देब सिंह पुत्र शेर सिंह धपोला।
पटेल हाईस्कूल चौरा के प्रांतीयकरण का मामला सीएम के सामने रखा है। स्कूल को वित्तीय मान्यता भी प्रदान कराई जाएगी।
बलवंत सिंह भौर्याल विधायक कपकोट।