बागेश्वर। देश में हर साल कैंसर से लाखों लोगों की मौत हो जाती है। तंबाकू, सिगरेट, गुटका सेवन करने वालों में कैंसर का खतरा अधिक रहता है। अधिकांश लोग इस बीमारी की चपेट में आने से जान गंवा देते हैं, वहीं कुछ जीवट इच्छाशक्ति वाले न सिर्फ इस बीमारी से लड़कर जीतते हैं बल्कि स्वस्थ होने के बाद लोगों को तंबाकू, सिगरेट औैर गुटका छोड़ने के लिए प्रेरित भी करते हैं। ऐसे ही लोगों में शामिल हैं नगर के व्यापारी साजिद अली। मुंह के कैंसर से ग्रसित साजिद ने पहले बीमारी को मात दी और अब लोगों को गुटका छोड़ने के लिए जागरूक कर रहे हैं। उनके प्रयास से अब तक 65 लोग गुटका और तंबाकू के सेवन से तौबा कर चुके हैं।
मूल रूप से हल्द्वानी के निवासी साजिद बागेश्वर में रहकर व्यापार करते हैं। जवानी में उन्हें गुटखा खाने की लत लग गई थी। समय के साथ उनकी यह आदत बढ़ती गई और उसका दुष्प्रभाव भी दिखने लगा। सितंबर 2017 में उनके मुंह के एक हिस्से में दिक्कत होने लगी। उन्होंने जिला अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टरों ने दांत की दिक्कत बताकर दवाइयां दे दी, लेकिन कुछ लाभ नहीं हुआ। हल्द्वानी के अस्पताल में इलाज कराने पर भी राहत नहीं मिली। चार महीने की भागदौड़ के बाद उन्हें अल्मोड़ा के एक डॉक्टर ने दिल्ली जाकर जांच कराने की सलाह दी। दिल्ली में जांच कराने पर उन्हें कैंसर होने की जानकारी मिली। आर्थिक रूप से अधिक संपन्न नहीं होने के कारण साजिद को इलाज की चिंता सताने लगी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। परिवार और साथियों की मदद से उन्होंने कैंसर का ऑपरेशन कराया।
वे कहते हैं कि इलाज के दौरान उन्हें पहली बार तंबाकू की भयावहता का अहसास हुआ। इलाज काफी तकलीफदेह रहा। तीन जनवरी 2018 को उनका ऑपरेशन हुआ। जिसके बाद कई दिनों तक वे अस्पताल में रहे। इलाज पूरा होने तक करीब आठ लाख रुपये खर्च हो गए। साजिद कहते हैं कि एक बुरी आदत ने उनको आर्थिक और शारीरिक रूप से काफी परेशानियां दी। जिसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वह किसी अन्य को इस तकलीफ से गुजरने नहीं देंगे। वर्तमान में साजिद स्वस्थ हैं, लेकिन दवाइयां अब भी चल रही है। ऑपरेशन के कारण उनके चेहरा भी पहले जैसा नहीं रहा, लेकिन वह कहते हैं कि उन्हें जिंदगी ने सबसे बड़ा सबक दिया है। कैंसर ने उनके जीवन जीने के प्रति नजरिए में भी बदलाव किया है।
गुटका नहीं जहर है, इसका परिणाम कैंसर है
बागेश्वर। कैंसर को मात देकर लौटने के बाद साजिद ने गुटका और तंबाकू का सेवन करने वाले अपने करीबियों को ऑपरेशन और इलाज के दौरान के फोटो दिखाए और गुटखा छोड़ने की अपील की। जिसका असर हुआ और कई लोगों ने तंबाकू और गुटका सेवन से तौबा कर ली। बागेश्वर से लेकर हल्द्वानी तक वह लगातार अपनी मुहिम को जारी रखे हुए हैं। उनका कहना है कि वह जीवन की अंतिम सांस तक तंबाकू और गुटका खाने वालों को इस जहरीले पदार्थ का सेवन छोड़ने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।