वरिष्ठ नागरिक न्यास की बैठक में विचार रखते एडवोकेट गोविंद सिंह भंडारी। संवाद
बागेश्वर। कुली बेगार आंदोलन की धरती बागेश्वर में आगामी उत्तरायणी स्वाधीनता आंदोलन के लिहाज से महत्वपूर्ण होने जा रही है। सेनानियों के परिजन और अन्य संगठनों के लोग कुली बेगार आंदोलन की वर्षगांठ पर पदयात्रा निकालेंगे। पदयात्रा उसी रास्ते से निकाली जाएगी, जिस रास्ते से गुजरकर कुमाऊं केसरी केसरी पंडित बीडी पांडेय और अन्य सेनानियों ने इस प्रथा का विरोध किया था।
रविवार को जिला बार संघ भवन में हुई वरिष्ठ जन कल्याण न्यास और अधिवक्ता संगठन की बैठक में कुमाऊं केसरी बीडी पांडेय के पौत्र कर्नल रवि पांडेय, सेनानी हरगोविंद पंत की पौत्रवधू वसुंधरा पंत की मौजूदगी में यह निर्णय लिया गया। वर्ष 1921 में कुमाऊं केसरी पांडेय ने अन्य सेनानियों के साथ कुली बेगार के रजिस्टरों को सरयू नदी में बहाया था। तय कार्यक्रम के अनुसार यात्रा जनवरी प्रथम सप्ताह में शुरू होगी।
12 जनवरी को यात्रा चामी गांव के हरज्यू मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी। 13 जनवरी को बागेश्वर पहुंचेगी। सांस्कृतिक जुलूस में शिरकत करते हुए नुमाइशखेत मैदान तक जाएगी। बड़ी संख्या में सेनानी परिवार के लोग पदयात्रा में शिरकत करेंगे। अधिवक्ता महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह भंडारी ने बताया कि देश की आजादी के लिए कुली बेगार आंदोलन ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। न्यास के अध्यक्ष दलीप खेतवाल ने कहा कि पदयात्रा को यादगार बनाया जाएगा। बैठक में हरीश सोनी, इंद्र सिंह परिहार, भवानी राम आगरी, बंशीधर जोशी आदि मौजूद थे।