बागेश्वर। सरयू नदी के उद्गम स्थल सरमूल और सहस्त्रधारा को पर्यटन के क्षेत्र में पहचान दिलाने के बाद अब नंदाकुंड को भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कराने की मुहिम शुरू हो गई है। सरमूल, सौधारा, भद्रतुंगा विकास समिति 29 सितंबर से सरमूल और नंदाकुंड की 70 किमी की पदयात्रा शुरु करने जा रही है। पांच दिन की इस यात्रा के दौरान भद्रतुंगा से नंदाकुंड तक के रास्तों और खूबसूरत दृश्यों की डॉक्यूमेंट्री भी बनाई जाएगी।
नंदाकुंड कपकोट तहसील का पवित्र और मनोरम स्थल है। यहां से मां नंदा की पूजा के लिए स्थानीय लोग ब्रह्मकमल लाते हैं। वर्ष के अधिकांश महीनों में यहां बर्फ रहती है। अपनी प्राकृतिक सौंदर्य के चलते यह बाहर से आने वाले सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। हालांकि अब तक शासन-प्रशासन की नजरों में नहीं आने के चलते नंदाकुंड के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। सरमूल, सौधारा, भद्रतुंगा विकास समिति ने नंदाकुंड को पर्यटन मानचित्र पर उभारने का बीड़ा उठाया है। जिसके तहत समिति के सदस्य दुर्गम क्षेत्र के इस कठिन डगर की पदयात्रा करने जा रहे हैं। यात्रा के बाद वहां से एकत्र जानकारियों और वहां की खूबसूरती पर बनी डॉक्यूमेंट्री को शासन-प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा। सरकार से क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की मांग की जाएगी।
भद्रतुंगा से शुरू होगी यात्रा, नौ यात्री करेंगे प्रतिभाग
बागेश्वर। सरमूल, सौधारा, भद्रतुंगा विकास समिति के सलाहकार दयाल सिंह कुमल्टा ने बताया कि यात्रा में समिति के सदस्यों सहित नौ लोग भागीदारी करेंगे। सभी लोग 28 सितंबर की शाम संत रामानंद आश्रम भद्रतुुंगा में पूजा अर्चना करेंगे। आश्रम में रात्रि विश्राम के बाद 29 सितंबर की सुबह यात्रा का आगाज होगा। उस दिन रात्रि विश्राम झूनी गांव की चोटी पर बसे पकुवा टॉप में किया जाएगा। 30 सितंबर को पकुवा टॉप से सरमूल की यात्रा पूूरी कर यात्री कौतेला टॉप में रात्रि विश्राम करेंगे। एक अक्तूबर को दल नंदाकुंड पहुंचेगा। नंदाकुंड में पूजा अर्चना और डॉक्यूमेंट्री शूटिंग के बाद दल कौतेला टॉप लौटेगा, यहां रात्रि विश्राम के बाद दो अक्तूबर को झूनी लौटेगा। झूनी से तीन अक्तूबर को यात्री भद्रतुुंगा लौटेंगे। जहां यात्रा समापन के बाद यात्री अपने-अपने घर को रवाना होंगे।