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बदियाकोट और लीती में ब्रह्म कमल पुष्प से होगी मां भगवती की पूजा

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बागेश्वर के बदियाकोट का भगवती मंदिर। फाइल फोटो - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर/कपकोट। नंदाष्टमी को कपकोट क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक भगवती मंदिरों में नंदाष्टमी महोत्सव का आयोजन होता है। मां आदिबद्री भगवती मंदिर बदियाकोट और मां भगवती मंदिर लीती और भगवती मंदिर सोराग में होने वाली पूजा में मां भगवती की पूजा राजकीय पुष्प ब्रह्म कमल से की जाती है। पूजा के एक सप्ताह पहले भक्त मंदिर से आशीर्वाद लेकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पुष्प लेने रवाना हो जाते हैं। पुष्प आने के बाद अष्टमी को विधिविधान से मां भगवती की पूजा के साथ महोत्सव शुरू होता है।
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भगवती मंदिरों में पूजा से पहले गेहूं भराई, गेहूं पिसाई, देवडांगर को आमंत्रण करना शुरू हो जाता है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को सभी मंदिरों में विधिविधान से पूजा शुरू होती है। नंदाष्टमी का बदियाकोट, लीती गांव के भगवती मंदिरों में होने वाली पूजा को खास बनाता है उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला पुष्प ब्रह्मकमल।
इस पुष्प को लाने के लिए अष्टमी से पूर्व मंदिर के पुजारी (धामी) मोर (वाहक) और जतेर (यात्री) हिमालयी क्षेत्रों को रवाना हो जाते हैं। पूर्ण शुद्धता के साथ पुष्प को लाने की रश्म अदा की जाती है। सप्तमी के दिन पुष्प लेकर यात्री मंदिर में पहुंचते हैं। रात को देवडांगर अवतरित होते हैं। अष्टमी के पूरे दिन और रात मां भगवती की पूजा की जाती है। अगले दिन प्रसाद वितरण के साथ महोत्सव का समापन होता है।
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एक समय भोजन और नंगे पैर चलकर लाते हैं ब्रह्म कमल
बागेश्वर। मां भगवती को अर्पित करने के लिए ब्रह्म कमल लाने की यात्रा काफी दुर्गम और कठिन होती है। लीती गांव के लोग नंदाकुंड से ब्रह्मकमल लाते हैं, जिसके लिए उन्हें पांच दिन की यात्रा करनी पड़ती है। बदियाकोट के लोग सम बुग्याल से दो दिन की यात्रा के बाद ब्रह्मकमल लाते हैं। सोराग गांव के लोग सुबह जाकर शाम को पत्थरकुड़ी बुग्याल से ब्रह्मकमल लेकर पहुंचते हैं।
ब्रह्मकमल लाने के दौरान भक्तों को मंदिर से बुग्यालों की यात्रा नंगे पैर करनी पड़ती है। इस दौरान केवल एक बार ही सात्विक भोजन किया जाता है। पुष्प लेने रवाना होते समय पूरा गांव यात्रियों को विदा करता है और पुष्प लाने पर ढोल नगाड़ों के साथ यात्रियों का स्वागत किया जाता है।
लीती में आठ वर्ष बाद होगा नंदाष्टमी महोत्सव
बागेश्वर। बिचला दानपुर के लीती गांव के भगवती मंदिर में हर तीसरे वर्ष नंदाष्टमी महोत्सव का आयेेजन किया जाता है। हालांकि कुछ कारणों से बीच में महोत्सव नहीं हो सका था। इस बार आठ वर्ष बाद नंदाष्टमी महोत्सव कराया जा रहा है।
मान्यता है कि लीती गांव की एक बुजुर्ग महिला ने मां भगवती का खड्ग देखा था। जिसे वह अपने घर ले आई थी। कुछ दिनों बाद उसे खड्क के माता भगवती के होने का अंदेशा हुआ। जिसके बाद खड्ग मिलने वाले स्थान पर मंदिर की स्थापना की गई। तब से लेकर कोरंगा मूल के लोग मां भगवाती की पूजा करते हैं। यहां तीन दिनों तक महोत्सव का आयोजन होता है।
इन मंदिरों में भी होगा नंदाष्टमी महोत्सव
कपकोट। तहसील क्षेत्र के बदियाकोट, सोराग और लीती के अलावा पोथिंग, जगथाना, गोगिना, वाछम, बैछम, पेठी, बघर, किलपारा, ढोक्टीगांव, किलपारा और कुंवारी के भगवती मंदिरों में भी नंदाष्टमी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
कपकोट क्षेत्र में मां भगवती के बदियाकोट, पोथिंग और बैछम धार तीन सिद्धपीठ माने गए हैं। जिसके चलते इन तीनों मंदिरों में एक साथ आठों या नंदा जात नहीं मनाई जाती है। इस वर्ष पोथिंग गांव में आठों और बदियाकोट में सलपाती का आयोजन किया जा रहा है।
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